40 दिन पहले से करते हैं परहेज
श्रीराम का किरदार निभाने के लिए 40 दिन पहले से ही दानिश अपने खानपान व बोलचाल को संयमित करते हैं। श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को सुनते हैं। किसी से अधिक बात भी नहीं करते। थिएटर में भी रामलीला का मंचन शुरू होने के 15 दिन पहले से सुंदरकांड का पाठ किया जाता है।
तिलक लगाकर चले गए थे घर तो सुनने पड़े ताने
दानिश ने बताया कि शुरुआत में समाज के ही कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने जमकर विरोध किया। एक बार मंचन के बाद घर जाते समय लोग उन्हें घूर रहे थे और भला-बुरा कह रहे थे।
बाद में पता चला कि किरदार निभाने के बाद वह जल्दबाजी में मुंह धोना भूल गए थे और माथे पर तिलक लगा रह गया था। अब तो समाज के अन्य लोग भी आगे आ रहे है। पिछले वर्ष रामलीला मंचन में कैफी खान शत्रुघ्न, रईस खान दशरथ, मोहसिन मेघनाद, अमान रजा और सादिक अंगद की भूमिका में नजर आए थे।
पुराना शहर के मोहसिन खान ने कहा कि मैंने इस साल की रामलीला में मेघनाद का किरदार निभाया था। थिएटर में श्रीराम के आदर्शों से सकारात्मक संदेश मिला, जो निजी जीवन में भी काम आ रहा है।
नैनीताल रोड रईस खान ने कहा कि मैं काफी समय से थिएटर से जुड़ा हूं। सभी तरह के किरदार निभाता हूं जो लोगों को पसंद भी आते हैं। एक कलाकार के रूप में यही मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है।