उसे दो दिन तक सर्विलांस पर रखा
उससे कहा कि इस आधार आईडी को नवाब मलिक ने कई जगह मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल किया है। केस सॉल्व होने तक आपको सर्विलांस पर रखा जाएगा। फिर एक खाता नंबर देकर कहा कि जांच होने तक अपने खाते की रकम को इसमें ट्रांसफर कर दीजिए।
क्या अतीत में जाना संभव है?: बरेली में दसवीं के छात्र ने तैयार किया शोधपत्र, नासा ने की सराहना
उसके बताए खातों में छात्रा ने 817297 रुपये ट्रांसफर कर दिए। दो दिन बाद स्काइप पर कॉल बंद करने को कहा गया। तब साइबर क्राइम अधिकारियों के हस्ताक्षर प्रदर्शित करते हुए वित्त विभाग से एकनॉलेजमेंट लेटर दिया गया। इसके बाद छात्रा को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस को सूचना दी। साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह के अनुसार टीम मामले की पड़ताल में जुटी है।
निगरानी के दौरान सिर्फ जरूरी कॉल करने दी
छात्रा ने बताया कि साइबर ठगों ने दो दिन तक उसे निगरानी में रखा। पूरे समय उसके लैपटॉप की स्क्रीन खुली रही। वह अपने हॉस्टल के कमरे में बंद रही। स्क्रीन के सामने बैठकर केवल जरूरी कॉल रिसीव करने दी गईं। फ्रेश होने या कुछ बनाने, खाने को जाते वक्त मोबाइल स्क्रीन के सामने रखकर जाना पड़ा। वह इतनी घबरा गई थी कि अपने साथ हो रही धोखाधड़ी को समझ ही न सकी।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट
डिजिटल अरेस्ट ब्लैकमेल करने का नया तरीका है। साइबर थाने के इंस्पेक्टर नीरज सिंह के मुताबिक डिजिटल अरेस्ट स्कैम के शिकार वह लोग होते हैं जो अधिक पढ़े-लिखे और कंप्यूटर फ्रेंडली होते हैं। डिजिटल अरेस्ट का मतलब है कि कोई आपको ऑनलाइन धमकी देकर वीडियो कॉलिंग के जरिए आप पर नजर रख रहा है। अक्सर डिजिटल अरेस्ट के दौरान साइबर ठग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर लोगों को धमकाते और अपना शिकार बनाते हैं।