मेले के दूसरे दिन भारी तादाद में पहुंचे शहरवासी, जमकर हुई खरीदारी
बरेली। बरेली क्लब ग्राउंड में चल रहे उत्तरायणी मेले का लुत्फ लेने के लिए दूसरे दिन हजारों की तादाद में शहरवासी पहुंचे। गुनगुनी धूप के बीच मंच पर एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने मैदान में पहाड़ का रंग जमा दिया। रणसिंघा की धुन और ढोल की थाप शुरू हुई तो जो जहां था, वहीं थिरकता नजर आया। सुबह से शुरू हुआ आकर्षक प्रस्तुतियों का दौर देर रात तक जारी रहा।
उत्तरायणी जन कल्याण समिति की ओर से आयोजित मेले के दूसरे दिन का उद्घाटन मुख्य अतिथि विधायक अरुण कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन और फिर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार, भाजपा के संगठन मंत्री भवानी सिंह, विधायक राजेश मिश्रा पप्पू भरतौल क्रमवार कार्यक्रम में पहुंचे। मेले के आयोजन को सराहते हुए समिति का हौसला बढ़ाया। दिन भर मेले में खरीदारी और मंच पर कार्यक्रमों का दौर जारी रहा। शाम के रंगारंग कार्यक्र्रमों का आगाज अपर पुलिस महानिदेशक अवनीश चंद्र ने समिति के पदाधिकारी अध्यक्ष पीसी पाठक, महामंत्री भुवन चंद्र पांडेय, रमेश शर्मा, सुरेंद्र सिंह बिष्ट, मनोज कांडपाल, भवानी दत्त जोशी, डीडी बेलवाल, देवेंद्र जोशी, मनोज पांडे के साथ दीप प्रज्जवलित कर किया। इसके बाद उत्तराखंड से लोककला और सांस्कृतिक परिवेश को समेटे बरेली पहुुंचे कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से शहरवासियों को सराबोर किया।
सुरों के जादू से मंत्रमुग्ध हुए दर्शक
उत्तराखंड के सुपर स्टार आनंद सिंह कोरंगा ने जब मंच संभाला तो लोग झूम उठे। उन्होंने ‘मेरी लछिमा न भूलो मेरो रंगीलो पहाड़’, कुलीरोली, घुरडाना बुरूसी, क्वेदीना हमले दिया न न न आदि गीत सुनाकर समां बांध दिया। इसके बाद लोक गायिका डॉ. लता तिवारी ने भी अपने सुरों से लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया। वहीं, सांस्कृतिक टीमों में सदाबहार संगम सांस्कृतिक कला मंच देहरादून से हेमंत बडोला, दिव्य ज्योति लोक कला विकास समिति खटीमा से कोमल राणा, अशोक खनका और व्याख्या जनजागृति संगीत, नाट्स समिति खटीमा हल्द्वानी से आए नंद किशोर नंदू ने भी अपनी मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। आखिर में पूरन सिंह दानू ने भी अपनी आवाज के जादू से बरेली को थिरकने पर विवश कर दिया। उनके अलावा जगदीश आर्या ने भी प्रस्तुति दी। शोका समाज के घनश्याम सिंह ग्वाल और नारायण सिंह दुग्ताल के नेतृत्व में टीम ने शानदार प्रस्तुति दी। उभरते हुए एकल कलाकार जगदीश कांडपाल ने भी आवाज का जादू बिखेरा।
सेल्फी क्लिक कर स्टाल पर पहुंचे लोग
मीडिया प्रभारी रमेश चंद्र ने बताया कि मेले में लगे 125 स्टालों पर सर्वाधिक मांग बाल मिठाई की चॉकलेट की रही। इसके अलावा कुमाऊं नमकीन, पिथौरागढ़ के मड़वे के बिस्किट, आटा, जैविक चाय, कौसानी के गर्म ऊनी वस्त्र की भी जमकर बिक्री हुई है। गुनगुनी धूप खिलने की वजह से देर तलक लोग मैदान में जमे रहे। इस दौरान मेले के बीचोबीच बनाया गया सेल्फी प्वॉइंट शहरवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। वर्टिकल गार्डन समेत देवभूमि के साथ खूब तस्वीरें क्लिक कीं।
स्मार्टफोन से लोककला प्रभावित होने का टूटा भ्रम
मेले के आकर्षण का केंद्र रहे गायक आनंद सिंह कोरंगा ने बताया कि युवाओं में लोककलाओं को उभारने और उसे आगे संवर्धित करने को लेकर बुजुर्गों को चिंता थी। वहीं, इंटरनेट आने के चलते इसके और भी दुष्परिणाम की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन इंटरनेट ने युवाओं को लोककला से जोड़ने का काम किया है। बताया कि उनकी करीब सौ से ज्यादा गीत एल्बम के तौर पर रिकॉर्ड हो चुके हैं। अब वह भी यूट्यूब पर अपने गीतों को अपलोड कर रहे हैं। ताकि देश समेत विदेश में मौजूद लोग भी अपनी कला और संस्कृति से रूबरू हो सकें। उत्तराखंड के फेमस मिमिक्री आर्टिस्ट अनिल भटनागर ने भी आनंद की बात का समर्थन किया। यहां मौजूद लोक कलाकार जगदीश कांडपाल ने बताया कि अब बड़ी तेजी से युवा लोककला की ओर से खिंच रहे हैं। अंतर्जाल (इंटरनेट) ने ही युवाओं को लोक से जोड़ा और कला को आगे बढ़ाने का भी कार्य किया है।