खतरनाक बुखार ने सीआरपीएफ के डिप्टी कमांडेंट मोहित रस्तोगी की भी जान ले ली। वह एक सप्ताह पहले सरकारी काम से दिल्ली गए थे और वहां बीमार पड़ गए। पहले बरेली फिर फैजाबाद में इलाज के दौरान हालत नहीं सुधरी तो उन्हें लखनऊ के केजीएमयू में भर्ती कराया गया। वहां मंगलवार रात उनकी मौत हो गई। घर वालों ने फैजाबाद और लखऊन में गलत इलाज से मौत होने की बात कही है।
बिहारीपुर में रहने वाले 42 वर्षीय मोहित रस्तोगी फैजाबाद में सीआरपीएफ 63 बटालियन में डिप्टी कमांडेंट के पद पर तैनात थे। उनके पिता कृष्ण औतार रस्तोगी, पत्नी हेमा रस्तोगी और 11 वर्षीय बेटी मोहिनी बरेली में रहते हैं। पिता ने बताया कि एक सप्ताह पहले मोहित दिल्ली गए थे। वहां बीमार हुए तो बरेली आ गए। यहां एक निजी डॉक्टर को दिखाया तो ठीक हो गए थे। उसके बाद उन्हें फैजाबाद जाना पड़ा। वहां फिर बीमार हो गए। आरोप है कि यहां डॉक्टर ने गलत इलाज किया जिससे मोहित की हालत बिगड़ गई। यहां से सीधे लखनऊ केजीएमयू ले गए। वहां इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी मौत हुई। पिता ने आरोप लगाया कि गलत इंजेक्शन से मोहित ने दम तोड़ा। डॉक्टरों ने बताया कि उसको ब्रेन हैमरेज हो गया। नाक और कान से रक्तस्त्राव भी हो रहा था।
मोहित का दिसंबर में होने वाला था प्रमोशन
मोहित रस्तोगी के पिता ने बताया कि दिसंबर में उनका प्रमोशन होने वाला था। पिता का रो- रोकर बुरा हाल था। मोहित उनकी इकलौती संतान थी।
बरेली आया शव, रो पड़े लोग
मोहित का शव बिहारीपुर आने पर मोहल्ले के भी लोग रो पड़े। शहर के कई लोेग अंतिम दर्शन को पहुंचे। पूर्व सांसद प्रवीन सिंह ऐरन और पूर्व मेयर सुप्रिया ऐरन भी परिवार के लोगों को सांत्वना देने पहुंचीं। उन्होंने कहा कि लखनऊ के केजीएमयू अस्पताल ने मोहित का गलत इलाज किया है। इसकी जांच होनी चाहिए।