फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एक धारा खत्म हुई, अभी बहुत धाराएं हैं

Wed, 25 Mar 2015 01:38 AM IST
बरेली
विज्ञापन
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट यानी सूचना प्रौद्योगिकी कानून-2000 की धारा 66 ए को अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया है लेकिन  इसका मतलब यह नहीं है कि इसके बाद अभिव्यक्ति की आजादी के लिए किसी को भी असीमित अधिकार हासिल हो जाएंगे। इस धारा के खत्म होने के बाद भी सोशल मीडिया पर कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाले या किसी की धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले और अश्लील पोस्ट पर कानूनी कार्रवाई होगी। विशेषज्ञों के मुताबिक, आईटी एक्ट में ही अभी भी कई धाराएं हैं, जिनमें अभिव्यक्ति के दायरे के बाहर के पोस्ट पर मुकदमा दर्ज होने और गिरफ्तारी के अलावा सजा तथा जुर्माने के प्रावधान हैं। इतना ही नहीं, सोशल मीडिया पर सामाजिक विघटनकारी और अशांति फैलाने वाले वह पोस्ट जिनसे उन्माद फैल सकता हो उनमें आईपीसी यानी भारतीय दंड संहिता की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई का अधिकार पुलिस के पास बरकरार रहेगा।
विज्ञापन

बरेली कॉलेज में लॉ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. धर्मेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने आईटी एक्ट की धारा 66 एक को इसलिए असंवैधानिक करार देते हुए रद्द किया है क्योंकि इसमें ऐसे मामले भी पुलिस ने दर्ज कर लिए थे, जो भारतीय संविधान में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आते हैं। ऐसे में, किसी समुदाय, रंगभेद, भाषा और क्षेत्र के आधार पर की गई टिप्पणी और ऐसे मामलों में जिनसे कानून व्यवस्था भंग हो सकती है, इनमें कार्रवाई की जा सकती है और आईटी एक्ट की यह धारा खत्म होने के बाद भी इन मामलों में कार्रवाई पूर्व की भांति हो सकेगी। बरेली कॉलेज में ही लॉ के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार बताते हैं कि धारा 66ए आईटी एक्ट में वर्ष 2009 में जोड़ी गई लेकिन इसमें बहुत सारी चीजें अस्पष्ट थीं लेकिन अब पुलिस आईपीसी की धाराओं में वही काम करेगी।

इंसेट...
यह हैं धाराएं और सजा का प्रावधान
आईटी एक्ट-
0 धारा 66 (ई)- इंटरनेट पर किसी की निजता भंग करना। इसमें तीन साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
0 धारा 67- इंटरनेट पर अश्लील सामग्री डालना। पहली बार में तीन साल तक की सजा और दूसरी बार में पांच साल की सजा और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना।
0 धारा 66 (ई)- इंटरनेट पर किसी की निजता भंग करना। इसमें तीन साल तक की सजा और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
आईपीसी-
0 धारा 153 (ए)- लोकशांति भंग करने के लिए काम करना। इसमें तीन साल तक की सजा हो सकती है।
0 धारा 292- अश्लील सामग्री का किसी भी रूप में प्रकाशन। इसमें दो साल तक की सजा का प्रावधान है।
0 धारा 295 (ए)- धार्मिक भावनाएं भड़काकर उन्माद फैलाना। इसमें तीन साल तक की सजा हो सकती है।
0 धारा 499- किसी की मानहानि करना। इसमें दो साल की सजा का प्रावधान है।।


इंसेट...
विधि विशेषज्ञों का कथन...
इस धारा के खत्म होने के बाद भी सोशल मीडिया पर कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाले या किसी की धार्मिक भावनाओं को भड़काने वाले और अश्लील पोस्ट पर कानूनी कार्रवाई आईपीसी की धाराओं में हो सकेगी।
विज्ञापन

-डॉ. प्रदीप कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, लॉ

धारा 66 ए सुप्रीम कोर्ट ने इसलिए भी रद्द की है क्योंकि इसके पक्ष में सरकार कोई तथ्य प्रस्तुत नहीं कर पाई, जिससे यह साबित हो सके कि इस धारा का बने रहना जरूरी हो लेकिन यह धारा खत्म होने का मतलब यह नहीं कि कानूनी कार्रवाई नहीं होगी।
विज्ञापन

-डॉ. डीके सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, लॉ
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें