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पीएसी कमांडेंट के घर चोरी से हड़कंप, चार टीमें लगाईं

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बरेली। पीएसी के कमांडेंट आईपीएस अधिकारी विकास वैद्य के घर से लाखों की चोरी होने की घटना से हड़कंप मचा है। नौकर की ओर से बिना रकम या माल का जिक्र किए एक रिपोर्ट बारादरी थाने में अज्ञात चोरों के खिलाफ करा दी गई है। खुलासे को पुलिस और क्राइम ब्रांच की चार टीमें लगाई गई हैं। शक स्थानीय चोरों पर ही है।
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कुछ माह पहले ही बरेली में आठवीं वाहिनी पीएसी के कमांडेंट बनकर आए आईपीएस विकास वैद्य का एक घर बारादरी क्षेत्र की गोल्डन ग्रीन पार्क कॉलोनी में है। वे परिवार समेत फिलहाल पीएसी परिसर में रहते हैं। इस घर में उनकी और परिवार की आवाजाही रहती है। करीब छह साल से हरुनगला निवासी हीरानंदन नाम का व्यक्ति इस घर की रखवाली के लिए रख लिया है। वह ड्राइविंग भी कर लेता है। रोज की तरह शुक्रवार शाम वो इपने घर हरुनगला में खाना खाने गया था। लौटकर रात करीब नौ बजे आया तो देखा कि मेन गेट से लेकर अंदर तक ताले टूटे हैं। सूचना पर श्री वैद्य खुद आ गए। देर रात एसपी क्राइम समेत कई अधिकारियों ने घर का मुआयना किया। फील्ड यूनिट ने भी जांच की। अंदर के लकड़ी के गेट का लॉक तोड़कर चोर कमरे के रास्ते उस स्टोर तक पहुंचे थे जिसमें मंदिर के साथ वो अलमारी थी जिसमें नकदी जेवर रखा था। चोरों ने यहां से लाखों का माल उड़ा लिया। हालांकि कितना माल गया? इस बारे में शनिवार को बारादरी थाने में हीरानंदन की ओर से दर्ज रिपोर्ट में भी उल्लेख नहीं है। श्री वैद्य के साथ ही पुलिस के अधिकारी जानकारी देने से कतरा रहे हैं। दूसरी ओर सुरागकशी और धरपकड़ तेजी से जारी है। पुलिस के साथ ही क्राइम ब्रांच लगातार की टीमें लगी हैं।

सीसीटीवी कैमरे दे गए दगा
- शनिवार को पुलिस और क्राइम ब्रांच ने जांच की तो पाया कि आईपीएस अफसर के घर या आसपास कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा है। गली के बाहर लगे दो कैमरे खराब मिले। वहीं कॉलोनी के गेट पर लगे कैमरों से पुलिस को ऐसा कोई इनपुट नहीं मिला जिससे चोरों की पहचान हो सके। पड़ोसियों से बात हुई तो उन्होंने बताया कि शाम के वक्त घर में खटपट की आवाज तो उन्होंने सुनी थी पर सोचा कि परिवार के सदस्य या हीरानंदन कोई काम कर रहे हैं। इसलिए ज्यादा गौर नहीं किया। घर के बाहर कोई वाहन या संदिग्ध व्यक्ति भी नहीं दिखा।
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अफसर वफादार मानते हैं नौकर को
- हीरानंदन की भूमिका को लेकर उससे पुलिस ने पूछताछ की कोशिश की तो श्री वैद्य ने साफ कह दिया कि उस पर शक का सवाल ही नहीं उठता। वो बहुत ईमानदार है और छह साल से पूरे घर व सामान की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभाल रहा है। वे लोग उसे परिवार का सदस्य मानते हैं।

पड़ोसी गांवों के शातिरों पर नजर
-क्राइम ब्रांच का निशाना गोल्डन ग्रीन पार्क कॉलोनी के पीछे गांवों में बसे शातिर हैं। ये और महानगर जैसी पॉश कॉलोनियों में होने वाली चोरियों में इन्हीं शातिरों की संलिप्तता रहती है। ये लोग दिन में घूमकर उन घरों को देखते हैं जहां ताले लगे होते हैं। दो या तीन दिन रेकी के बाद वहां चोरी कर लेते हैं। बड़े परिसरों में बने आवासों में पड़ोसियों को भी एकदूसरे से ज्यादा मतलब नहीं रहता, इसलिए चोरी के दौरान बड़े खतरे का अंदेशा नहीं होता। टीम ऐसा ही लोगों को उठा रही है।
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