फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने का रैकेट 2007 में ही शुरू हो गया था। शासन ने 2001 में जिले की पुवायां तहसील के 90 गांव पीलीभीत जिले में शामिल कर दिए थे। इसी के बाद से फर्जीवाड़ा करने वालों की चांदी हो गई।
दरअसल गांव तो पीलीभीत में शामिल हो गए थे। लेकिन इनमें ज्यादातर गांवों में पुलिस की व्यवस्था इसी जनपद की रही। 2007 में सेहरामऊ उत्तरी थाने को भी पीलीभीत जिले में शामिल कर दिया गया। इस दौरान सेहरामऊ उत्तरी थाने का वह रजिस्टर गायब हो गया, जिसमें थाने के शस्त्र लाइसेंसों का विवरण था। वर्ष 2015 और 2017 में इस संबंध में एफआईआर भी दर्ज कराई गईं। दोनों मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं। शस्त्र रजिस्टर गायब होने के मामले में कलक्ट्रेट के वरिष्ठ लिपिक चंद्र प्रकाश के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। उन्हें डिमोशन देते हुए रिटायर भी कर दिया गया।
2007 में सेहरामऊ थाने में थे 142 शस्त्र लाइसेंस
शाहजहांपुर के सेहरामऊ उत्तरी थाने को 2007 में पीलीभीत के शामिल किया गया था। उस समय थाना क्षेत्र में शस्त्र लाइसेंसों की संख्या 142 थी। शस्त्र कार्यालय के रिकार्ड में यह दर्ज है। चूंकि थाना पीलीभीत में चला गया। शस्त्र रजिस्टर भी गायब हो चुका था। ऐसे में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने वाले रैकेट मोटी रकम लेकर थाना क्षेत्र के पते पर लोगों के लिए थोक में फर्जी लाइसेंस बनाने का धंधा चालू कर दिया।
अंतिम शस्त्र लाइसेंस नंबर 3099, इसके आगे के सब फर्जी
शस्त्र रजिस्टर गायब होने का मामला शासन तक पहुंचा था। स्थानीय स्तर पर भी उच्च स्तरीय जांच हुई। शस्त्र लाइसेंस रजिस्टर के बारे में तो कुछ पता नहीं नहीं, लेकिन शस्त्र कार्यालय ने पत्रावलियां जुटाकर पहेली को हल करने की कोशिश की। जांच में पता लगा कि सेहरामऊ थाना क्षेत्र में अंतिम शस्त्र लाइसेंस का नंबर 3099 है। इस संबंध में सूचनाएं शासन और पीलीभीत जिला प्रशासन को भे भेज दी गईं। इससे तय किया गया कि सेहरामऊ थाना अंतर्गत आने वाले शस्त्र लाइसेंस नंबर 3099 तक सही हैं। इसके आगे किसी नंबर पर लाइसेंस जारी हुआ है तो वह फर्जी है। इसको लेकर कुछ लोग हाईकोर्ट भी गए। कुछ मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।
जिले में 41 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंसधारी
- जिले में वर्तमान में 41 हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंसधारी हैं। शस्त्र लाइसेंस जारी करने पर लगी रोक हटने के बाद 15 हजार से ज्यादा लोगों ने नए शस्त्रों के लिए आवेदन भी किया है। कुछ नए शस्त्र जारी भी किए गए हैं। दरअसल, शाहजहांपुर का मिजाज कुछ अलग है। कभी दस्यु प्रभावित जिला रहे शाहजहांपुर में एक समय में शस्त्र लाइसेंस जारी करने में कुछ रियायतें भी बरती जाती थीं। धीरे-धीरे शस्त्र लाइसेंस सोसाइटी में एक स्टेटस सिंबल बनता गया। दस्यु गिरोह खत्म होने के बाद भी शस्त्र लाइसेंस के प्रति लोगों का प्रेम खत्म नहीं हुआ।
गाजियाबाद पुलिस ने जो दो फर्जी शस्त्र लाइसेंस पकड़े हैं, उनका बेरीफिकेशन शाहजहांपुर आया था। दरअसल, 2007 में सेहरामऊ उत्तरी थाना शाहजहांपुर से पीलीभीत जिले में शामिल कर दिया गया था। वहां का शस्त्र रजिस्टर गायब हो गया। शस्त्र कार्यालय के रिकार्ड के जरिए वैध
142 शस्त्रों की पहचान की गई थी। अंतिम शस्त्र लाइसेंस का नंबर 3099 था। इसके आगे के नंबर के लाइसेंस फर्जी हैं। रिपोर्ट गाजियाबाद पुलिस-प्रशासन को भेज दी गई थी।
- नरेंद्र सिंह, एडीएम प्रशासन/ प्रभारी अधिकारी आयुध