चार महीने पहले कालीबाड़ी के तीन भाईयों पर गैंगरेप का मुकदमा लिखाने वाली लड़की आईजी विजय सिंह मीना की चौखट पर फफक कर रो पड़ी। कहने लगी पुलिस ने मोटी रकम लेकर उसका केस बंद दिया। अब मुझे कहीं नहीं जाना है, मर जाऊंगी, यहां से कहीं नहीं जाऊंगी। आईजी के निर्देश पर स्टाफ अफसर इंस्पेक्टर सज्जाद अख्तर ने पीड़िता को समझाकर शांत किया।
लड़की ने चार महीने पहले कालीबाड़ी के रहने वाले कमल सिंह और उसके दो भाईयों पर कार से अगवा करके गैंगरेप करने का आरोप लगाते हुए बारादरी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मामले की विवेचना के दौरान महिला दरोगा प्रीति पवार ने केस को झूठा कहते हुए फाइनल रिपोर्ट लगा दी। सोमवार को पीड़िता ने आईजी से मिलकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की तो सच्चाई सामने आ गई। आईजी के स्टाफ अफसर ने इंस्पेक्टर बारादरी के मुकदमे के बारे में पूछा को मालूम हुआ कि लड़की के आरोप झूठे थे। उसने गैंगरेप का मुकदमा लिखाने के बाद उसने कोर्ट में बयान देकर घटना होने से ही इनकार कर दिया था। कमल से उसका समझौता हो गया था, उसी के आधार पर पुलिस ने केस बंद कर दिया। केस बंद होने की बात सुनते ही लड़की आईजी के ऑफिस के सामने सीढ़ी पर बैठकर फफकने लगी। कहने लगी पुलिस ने उसके साथ अन्याय किया है। वह यही जान दे देगी। किसी तरह लड़की को समझाकर स्टाफ अफसर ने मामला निपटा दिया।