बदायूं। बसपा सरकार में मजबूत पकड़ रखने वाला विधायक योगेंद्र सागर अपहरण और दुष्कर्म के मामले में करीब पांच साल बाद ऐसे ही गिरफ्तार नहीं हुआ। पहले उसको फरार घोषित किया गया। कुर्की से लेकर नीलामी तक की गई। लेकिन न तो वह कोर्ट में हाजिर हुआ और न ही पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकी। हाईकोर्ट ने डीएम और एसएसपी के बाद मुख्य सचिव और प्रदेश के डीजीपी तक को समन भेजा, तब जाकर नाटकीय ढंग से उसकी नोएडा से गिरफ्तारी हो सकी थी।
छात्रा के अपहरण और सामूहिक दुष्कर्म का मामला अप्रैल 2008 का है। अक्तूबर 2008 में सीबीसीआईडी ने इस मामले में एफआर लगा दी। इसके बाद पीड़ित पक्ष की अर्जी पर कोर्ट ने फरवरी 2009 में तत्कालीन बसपा विधायक योगेंद्र सागर, उसके नजदीकी रिश्तेदार तेजेंद्र सागर और मीनू शर्मा के खिलाफ अपहरण बलात्कार का परिवाद रजिस्टर कर तीनों आरोपियों को तलब कर लिया। मई 2010 में हाईकोर्ट ने आरोपियों की गिरफ्तारी का आदेश दिया। बसपा सरकार में अपने रसूख के बल पर योगेंद्र सागर न सिर्फ पीड़ित परिवार को तरह-तरह से परेशान करता रहा बल्कि गिरफ्तारी से भी बचता रहा। उस पर हाथ डालने की पुलिस में हिम्मत नहीं थी। अप्रैल 2011 में कुर्की वारंट के बाद भी वह कोर्ट में पेश नहीं हुआ। कुर्की के बाद कोर्ट के आदेश पर नीलामी कार्रवाई भी कर दी गई, लेकिन योगेंद्र सागर इसके बाद भी न तो गिरफ्तार हो सका और न कोर्ट में पेश हुआ। फरार घोषित होने और लगातार कार्रवाई के बाद भी उसकी गिरफ्तारी न होने पर पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। इस याचिका पर हाईकोर्ट ने पहले तो बदायूं के तत्कालीन डीएम और एसएसपी व एसओ बिल्सी के खिलाफ समन किए। इसके बाद भी योगेंद्र गिरफ्तार नहीं हो सका।
कोर्ट किसी भी मामले में फैसला हर पहलू को समझने, पत्रावली और साक्ष्यों का अध्ययन करने, गवाहों की गवाही और अधिवक्ताओं की जिरह के बाद करता है। योगेंद्र सागर मामले में भी ऐसा ही हुआ। सागर के खिलाफ लगातार गैर जमानती वारंट जारी किए गए, लेकिन वह हाजिर नहीं हुआ। कुर्की की उद्घोषणा और कार्रवाई के बीच भी समय दिया गया। इसके बाद भी पेश न होने पर हाईकोर्ट ने तत्कालीन डीएम, एसएसपी और इसके बाद तत्कालीन प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी को समन जारी कर तलब किया। प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी ने कोर्ट से कुछ समय मांगा। इसके बाद सागर की गिरफ्तारी नोएडा से हो सकी थी। - अरविंद शर्मा, पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता