फरीदपुर (बरेली)। राजस्थान के अजमेर में हुए सड़क हादसे ने कस्बे के ईट भट्ठा मजदूर परिवारों को ऐसा जख्म दिया है जो बरसों तक दर्द देगा। अजमेर से पोस्टमार्टम के बाद आए सात शवों को एक ही कब्रिस्तान में सुपुर्दे-ए-खाक किया गया तो सैकड़ों आंखें नम हो गईं और कई लोग फफक पड़े। इसी दौरान अजमेर में परिवार की एक और महिला के मरने की खबर आई तो चीखपुकार मच गई।
मोहल्ला फर्रखपुर गौंटिया के लोग 21 सितंबर की शाम मजदूरी करने अजमेर से गुजरात जा रहे थे। उनकी बस ट्रक से भिड़ गई। इसमें फरीदपुर के सात लोगों की मौके पर मौत हो गई। इनमें नियामत शाह के परिवार के ही चार लोग शामिल थे। नियामत शाह के बेटे इदरीश, इदरीश की बेटी पांच वर्षीय अलीना के साथ ही नियामत की बेटी तराना और तराना की एक साल की बेटी आलिया की मौत हो गई। तराना उस वक्त गंभीर घायल हुई थीं, उनकी अजमेर में मौत की खबर मंगलवार को बाकी शवों के दफन के वक्त आई।
इनके अलावा मौके पर मरने वालों में रिजवान का बेटा इरफान, अहमद शाह का बेटा आरिफ, गुड्डू की पत्नी शबाना, बातून शाह की बेटी महरूनिशां शामिल थे। शव सोमवार रात ही कस्बे में ले आए गए। मंगलवार सुबह पूरा माहौल गमगीन हो गया। पहले नियामत शाह के परिवार के तीन शवों को पास के कब्रिस्तान में सुपुर्दे-ए-खाक किया गया और उसके बाद यहीं पर चार और शवों को दफन किया गया। शवों के जनाजे जैसे ही निकले तो मोहल्ले में चीखपुकार मच गई। जनाजे में शामिल लोग अपने आंसू छलकने से रोक नहीं सके। अजमेर से एक अधिकारी भी उस बस के साथ आए जिसमें शव लाए गए। फरीदपुर एसडीएम विशु राजा भी पहुंचे। उन्होंने चार सदस्यों की मौत वाले नियामत शाह के परिवार को 15 हजार की आर्थिक मदद दी।