बदायूं। डीजीसी साधना शर्मा हत्याकांड के मुख्य आरोपी पीसी शर्मा का भाई भी सुबूत मिटाने के आरोप में फंस गया है। स्पेशल जज एससी एसटी एक्ट महेंद्र सिंह तृतीय ने आरोप विरचित करते हुए सुनवाई के लिए 30 अप्रैल 2022 तारीख मुकर्रर की है।
23 मई 2016 को डीजीसी साधना शर्मा की घर लौटते समय कार से कुचल कर हत्या कर दी गई थी। इसमें पूर्व विधायक योगेंद्र सागर समेत अन्य पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। पुलिस की जांच में पूर्व विधायक की नामजदगी झूठी पाई गई। डीजीसी साधना शर्मा की हत्या में पीसी शर्मा सहित कई लोगों के नाम उजागर हुए। पीसी शर्मा को क्राइम ब्रांच ने लखनऊ पुलिस के सहयोग से नौचंदी एक्सप्रेस में इलाहाबाद से बरेली आते समय में गिरफ्तार किया। पीसी की गिरफ्तारी के समय क्राइम ब्रांच ने उसके पास से चार मोबाइल बरामद किए थे। क्राइम ब्रांच ने सभी मोबाइल पीसी शर्मा के भाई धर्मेंद्र कुमार शर्मा उर्फ कल्लू की सुपुर्दगी में दे दिए थे।
वादी विपर्णा गौड़ ने क्राइम ब्रांच द्वारा पीसी से बरामद मोबाइल उसके भाई धर्मेंद्र को देने पर आपत्ति दर्ज कराई थी। तत्कालीन सीजेएम ने आपत्ति पर सुनवाई के बाद क्राइम ब्रांच की चूक मानते हुए आदेश दिया कि जब्त मोबाइल कोर्ट में दाखिल किए जाएं। आरोप है कि पीसी के भाई धर्मेंद्र उर्फ कल्लू ने मोबाइल से छेड़छाड़ कर उसमें से सुबूत मिटा दिए। इससे धर्मेंद्र कुमार शर्मा को सुबूत मिटाने का आरोपी बनाया गया है। बृहस्पतिवार को स्पेशल जज एससी एसटी एक्ट महेंद्र सिंह तृतीय में धर्मेंद्र कुमार शर्मा उर्फ कल्लू के खिलाफ साक्ष्य मिटाने के मुकदमे में आरोप विरचित करते हुए अगली सुनवाई 30 अप्रैल 2022 की नियत की है।