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अंतरात्मा जागी तो अपना गवाह भी नहीं बना पाप का भागी

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अभियुक्तों की ओर से पेश किया गया गवाह भी अदालत में सच बता बैठा
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पुलिस और पैनल के डॉक्टरों समेत 12 गवाहों ने बताया दरिंदगी का हाल
बरेली। बरेली की निर्भया को इंसाफ दिलाने में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ गवाहों की अहम भूमिका रही। पीड़ित और सरकारी पक्ष के गवाहों ने तो खुलकर गवाही दी ही, आरोपी पक्ष की ओर से पेश किए गए एक गवाह ने भी अदालत में पलटते हुए सच बयान कर दिया। पुलिस को इससे इस जघन्य अपराध की कड़ियां जोड़ने में काफी मदद मिली।
बारह गवाहों ने अभियुक्तों को फांसी की सजा का रास्ता दिलाने में मदद की। इनमें बच्ची के पिता, मां, दादी, पंचनामा कराने वाले कांस्टेबल अनिल कुमार, दरोगा मुकेश कुमार, विवेचक इंस्पेक्टर आरके सिंह, सीओ नरेश कुमार के साथ पोस्टमार्टम के पैनल में शामिल डॉक्टर नीलम आर्या, डॉ. बृजेश कुमार और डॉ. संजय कुमार शामिल थे। डॉक्टरों ने बताया कि बेरहमी से दुष्कर्म के बाद गला दबाकर हत्या की गई थी। प्राइवेट पार्ट बुरी तरह क्षतिग्रस्त था। डीजीसी क्राइम सुनीति कुमार पाठक ने बताया कि आरोपी पक्ष ने खेत मालिक महेंद्र गंगवार को अपने पक्ष में गवाही देेने के लिए पेश किया था। लंबी बहस में खेत मालिक ने कबूल कर लिया कि जब वह सरसों के खेत में पहुंचे तो बच्ची का शव पड़ा हुआ था और उसके नीचे के कपड़े गायब थे। लग रहा था कि उसके साथ दुष्कर्म के बाद हत्या की गई है।
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पुलिस ने अपनी केस डायरी में कुछ बच्चों की बात का जिक्र भी किया जिन्होंने खेत से बदहवास हालत में मुरारी और उमाकांत को भागते देखा था। इस तरह बिना चश्मदीद गवाह के भी कड़ियां जुड़ती चली गईं और लैब और पोस्टमार्टम से हुई पुष्टि के आधार पर केस मजबूत हो गया। रही-सही कसर इसके अलावा पीड़िता के गांव के महेंद्र और अभियुक्तों का मेडिकल परीक्षण करने वाले डॉ. वर्मा की गवाही ने पूरी कर दी जिनसे मदद की आस में मुरारीलाल और उमाकांत अपने जुर्म का इकबाल कर बैठे थे।

सीबीगंज के दरिंदे को महीने भर में उम्रकैद
हाल ही में सीबीगंज में भी पॉक्सो एक्ट से जुड़े मामले में तत्परता से पुलिस और कोर्ट ने कार्रवाई की थी। वहां 14 अक्तूबर को दो साल की बच्ची के साथ युवक ने दरिंदगी की थी। एसएसपी ने मौके पर जाकर दो घंटे में ही उसकी गिरफ्तारी करा दी थी। इसके बाद केवल छह दिन में इंस्पेक्टर बच्चू सिंह ने कोर्ट में चार्जशीट पेश कर दी थी। वहीं 14 कार्यदिवस में कोर्ट ने आरोपी को उम्रकैद की सजा सुना दी थी। महीने भर में ही सारी कार्रवाई कर दी गई।

पुलिस अफसरों ने जताई खुशी
कोर्ट के फैसले पर एडीजी जोन अविनाश चंद्र, डीआईजी रेंज राजेश पांडेय और एसएसपी शैलेश पांडेय ने खुशी जताई। एडीजी ने कहा कि इस मामले में संबंधित विवेचक व पुलिस स्टाफ से खास निगरानी रखने और त्वरित कार्रवाई के लिए कहा गया था। सभी गवाहों की प्राथमिकता से गवाही कराने व साक्ष्य जुटाने को कहा गया था। बालिकाओं के साथ होने वाले इस तरह के अपराध अक्षम्य हैं। पॉक्सो लागू होने के बाद कार्रवाई और तेज हुई है। इस तरह के दूसरे मामलों में भी पुलिस किसी स्तर पर लापरवाही न करे और सख्त से सख्त सजा दिलाने के लिए साक्ष्य जुटाए जाएं।
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पॉक्सो एक्ट में बढ़ा सजा का दायरा
पुराने कानूनों के मुकाबले पॉक्सो एक्ट लागू होने के बाद बालिकाओं के साथ होने वाले यौन जनित अपराधों में सजा का दायरा और तेजी दोनों बढ़ गई हैं। एडीजीसी क्राइम रीतराम राजपूत ने बताया कि अब 12 साल तक की बच्ची से दुष्कर्म में फांसी की सजा का प्रावधान है। दिल्ली के निर्भया मामले के बाद आरोपी की उम्र को लेकर भी सजा का नए तरीके से निर्धारण किया गया है। पहले 18 साल से कम उम्र के आरोपियों के अपराध की सुनवाई किशोर न्यायालय में होती थी और इस उम्र के अपराधियों को किशोर सदन में रखा जाता था। अब ऐसा नहीं है, इस तरह का जघन्य अपराध करने वाले 16 साल के अपराधी भी व्यस्कों की सुनवाई के हकदार होंगे और इन आरोपियों को भी जेल में भेजा जाएगा।
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