किराये के भवन में कर रहे थे धंधा
ये लोग किराये पर भवन लेकर नकली उत्पाद तैयार कर दूसरे जिलों व राज्यों में बिक्री के लिए भेजते थे। खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शिकायत मिलने पर जांच की जाती है। लोगों से बिना बिल और संदिग्ध पैकिंग वाले पान मसाला उत्पाद खरीदने से बचने अपील की है।
नकली उत्पाद के सेवन से स्वास्थ्य जोखिम की आशंका
जानकारों के मुताबिक नकली पान मसाला बनाने में घटिया तंबाकू, केमिकल और सिंथेटिक खुशबू का इस्तेमाल होता है। कई बार सड़े पदार्थ जैसे सुपारी और रंग मिलाकर उत्पाद तैयार करते हैं। मानक से अधिक रसायनों के इस्तेमाल से कैंसर, मुंह के छाले, दांतों की बीमारी और पाचन तंत्र पर गंभीर असर की आशंका होती है। ऐसे उत्पादों की पहचान आम लोग नहीं कर पाते, क्योंकि पैकिंग हूबहू असली ब्रांड जैसी दिखती है।
न बिल न कोई दस्तावेज
विशेषज्ञों का मानना है कि नकली गुटखा का कारोबार सिर्फ स्वास्थ्य के लिए ही खतरनाक नहीं है। इससे सरकार को भी राजस्व का नुकसान होता है। टैक्स चोरी के जरिए अवैध कारोबार करोड़ों रुपये का खेल बन चुका है। थोक बाजारों और छोटे कस्बों की दुकानों तक माल आसानी से पहुंच रहा है। कम कीमत और अधिक मुनाफे की वजह से विक्रेता जाने-अनजाने इस धंधे से जुड़ जाते हैं।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी प्रथम अक्षय गोयल ने बताया कि पान मसाला का कोई मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी नहीं है। फिर भी हम लोग एहतियात के तौर पर जांच के लिए नमूना लेकर भेजते हैं। रिपोर्ट के आधार पर जुर्माना और अन्य विधिक कार्रवाई की जाती है।