बाजार करीब 70 हजार रुपये का किराया हर महीने नगर निगम को दे रहा है। हम लोग दुकानों की मरम्मत करा लेंगे। हमारी मांग है कि मार्केट के हॉल, छज्जे, सीढ़ियां जैसे जो खुले हिस्से हैं, कम से कम निगम उन्हीं की मरम्मत करा दे। इनसे रोज प्लास्टर गिरता है। -राजेश छाबड़ा, अध्यक्ष शास्त्री मार्केट एसोसिएशन
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बाजार में दुकानों की स्थिति बहुत खराब है। मार्केट बहुत पुराना हो गया है। यहां शौचालय तक नहीं था। दुकानदारों ने आपसी सहयोग से हाल ही में तीन शौचालयों का निर्माण कराया है। यदि यही हाल रहा तो बाजार में किसी दिन बड़ा हादसा हो जाएगा। - मनोज कुमार अरोड़ा, व्यापारी
बाजार के कई हिस्से इतने जर्जर हैं कि कई बार उनके गिरने का खतरा महसूस होता है। हम व्यापारी ही अलग-अलग हिस्सों की मरम्मत कराते रहते हैं। इसे नगर निगम हमारी मजबूरी समझ रहा है। मरम्मत कराने के लिए उल्टे नगर निगम की अनुमति लेनी पड़ती है। -सुशील कुमार, व्यापारी
मार्केट की मरम्मत कराने के लिए हम व्यापारी एक बार नहीं, कई बार नगर निगम अफसरों के चक्कर काट चुके हैं। शासन स्तर पर भी लिखापढ़ी कर चुके हैं। ये सभी दस्तावेज हमारे पास सुरक्षित रखे हैं। मना कोई नहीं करता है लेकिन आज तक कुछ कराया किसी ने नहीं। -सुनील भसीन, व्यापारी
नगर निगम की प्रापर्टी है, रखरखाव की जिम्मेदारी उसी की है। इसी आस से हम नगर निगम से गुहार लगाते रहते हैं लेकिन उसके अफसरों का रवैया देखकर लगता है कि वे किसी हादसे का इंतजार कर रहे हैं। भवन इतना जर्जर हो चुका है कि कभी भी हादसा हो सकता है। -बलदेव नागपाल, व्यापारी
हम सभी व्यापारियों की सिर्फ एक ही मांग है कि मार्केट की मरम्मत नगर निगम करा दे। जो स्थिति है, वह बेहद खराब है। मार्केट की सीढ़ियां, लिंटर, पिलर, छज्जे और रेलिंग हादसे को दावत दे रहे हैं। किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा यहां हो सकता है। -दीपक अरोड़ा, व्यापारी