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चिंता : एल्बेंडाजोल की खुराक के बावजूद बच्चों के पेट में पनप रहे कीड़े

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बरेली। पेट के कीड़ों से बच्चों को सुरक्षित करने के लिए खिलाई जा रही एल्बेंडाजोल की खुराक मिट्टी खाने की आदत पर भारी है। इस आदत से 50 फीसदी बच्चे कीड़ों से मुक्त नहीं हो रहे। इसकी पुष्टि नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (एनसीडीसी) टीम के सर्वे में हुई है।
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पिछले माह एनसीडीसी की चार सदस्यीय टीम बरेली पहुंची थी। इसमें सहायक निदेशक डॉ. सिवा प्रसाद, शोध सहायक डी. रोहित, जगदीश, टेक्नीशियन आनंद सिंह शामिल थे। टीम ने बिथरी के भरतौल और शहर के कटरा चांद खां स्थित परिषदीय स्कूल के 66 बच्चों के मल का नमूना लिया। इसकी जांच में 30 बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव मिली। यानी पेट में कीड़े मिले। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. प्रशांत रंजन के मुताबिक दवा के बावजूद बच्चे मिट्टी खा लें तो कीड़े पनपने की आशंका होती है।
डॉ. रंजन का दावा है कि प्रतिवर्ष राष्ट्रीय कृमि निवारण दिवस मनाया जाता है। फरवरी और अगस्त में दो बार बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक खिलाई जाती है, ताकि कीड़ों से निजात मिल सके। अभिभावकों से दवा सेवन के बाद बच्चों को मिट्टी के सेवन से बचाने की अपील की है। ब्यूरो
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एनीमिया, कुपोषण, शारीरिक विकास होता प्रभावित
वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप गुप्ता के मुताबिक, बच्चों के पेट में अगर कीड़े हैं तो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं होती हैं। कुपोषण, एनीमिया की चपेट में आने के साथ ही शारीरिक विकास प्रभावित होने की आशंका रहती है। क्योंकि कीड़े पोषक तत्वों और खून को चूसते हैं। पौष्टिकता के अभाव में बीमारियाें की आशंका होती है। इसमें पेट दर्द, ऐंठन, दस्त, उल्टी, चिड़चिड़ापन आदि तकलीफ होती है।


आज बच्चों को दी जाएगी दवा की खुराक
‘पेट के कीड़ों से छुटकारा, सेहत मंद भविष्य हमारा’ थीम पर सोमवार को जिले के स्कूलों में राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। सभी स्कूल और आंगनबाड़ी केंद्र पर 19 वर्ष तक के बच्चों को एल्बेंडाजोल की खुराक खिलाई जाएगी। गैर पंजीकृत और स्कूल न जाने वाले बच्चों को भी ये दवा आंगनबाड़ी केंद्र में खिलाई जाएगी। मुहिम से छूटे बच्चों को 14 अगस्त को मॉक अप सत्र में दवा खिलाई जाएगी।
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