बरेली। एथलेटिक्स खेलों में प्रतिस्पर्धा का स्तर जितना तेजी से बढ़ रहा है, उतनी ही तेजी से तकनीक भी मैदान में अपनी जगह बना रही है। इन्हीं तकनीकी बदलावों में एक है फोटो फिनिशिंग सिस्टम, जिसका चलन हाल के वर्षों में तेजी से बढ़ा है। नियम के रूप में यह सिस्टम कई वर्षों से लागू है, लेकिन अब भी अधिकतर दर्शकों और कई खिलाड़ियों के लिए यह नया अनुभव है।
ओलिंपिक जैसे प्रतिष्ठित खेलों में तो इस प्रणाली का उपयोग कई वर्षों से किया जा रहा है। शहर में एक बार इसका उपयोग भी किया जा चुका है। फोटो फिनिशिंग सिस्टम में दौड़ प्रतियोगिता के दौरान फिनिश लाइन पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे लगाए जाते हैं। यह खिलाड़ियों के फिनिशिंग मोमेंट को मिलीसेकेंड तक की सटीकता के साथ रिकॉर्ड करता है। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि कौन सा खिलाड़ी पहले फिनिश लाइन पार कर गया और किसका समय उसके बाद रहा। खासकर नजदीकी मुकाबलों में, जहां सेकेंड के सौवें हिस्से का भी अंतर विजेता तय करता है, यह तकनीक निर्णायक की भूमिका निभाती है। संवाद
प्रणाली के माध्यम से आते हैं सटीक निर्णय
पहले मुकाबलों में नतीजों के लिए निर्णायक की आंखों के अनुमान या स्टॉपवॉच पर निर्भर रहना पड़ता था, जिसमें मानवीय त्रुटियों की संभावना रहती थी। लेकिन अब यह काम कैमरे की पैनी नजर और कंप्यूटर की सटीक गणना से होता है। कैमरे फिनिश लाइन पर ऐसे कोण से लगाए जाते हैं कि हर खिलाड़ी की अंतिम पोजीशन और समय स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड हो सके।
खिलाड़ियों के प्रदर्शन का होगा सही आकलन
खिलाड़ियों के मुताबिक प्रणाली के उपयोग से उनके प्रदर्शन का सही आकलन होगा। किसी भी प्रकार की गलतफहमी या विवाद की संभावना न के बराबर रह जाएगी। कोच भी फोटो फिनिश डेटा का इस्तेमाल कर खिलाड़ियों की रनिंग स्टाइल, अंतिम स्पीड और थकान के स्तर का विश्लेषण कर सकते हैं, जिससे ट्रेनिंग और प्रदर्शन में सुधार संभव है।
-
फोटो
बाइट
करीबी मुकाबलों में अब किसी तरह का विवाद नहीं होगा। खिलाड़ी नतीजों पर पूरा भरोसा कर पाएंगे। यह तकनीक उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी।
- गजेंद्र तोमर, सचिव जिला एथलेटिक्स संघ
सेकेंड के सौवें हिस्से का भी फर्क अब साफ दिखेगा। खिलाड़ियों को अपने प्रदर्शन पर सही आकलन मिलेगा। यह सिस्टम मानसिक दबाव भी कम करेगा।
- अजय कश्यप, कोच एथलेटिक्स