शूटरों के लिए अच्छी खबर है। उन्हें अब प्रैक्टिस करने के लिए कारतूस की कमी नहीं झेलनी होगी। केंद्र सरकार की ओर से उनके लिए कारतूस की संख्या दो गुनी कर दी गई है। आर्थिक तंगी से झेल रहे ये खिलाड़ी उधार की रायफल लेकर मुकाम हासिल कर सकेंगे। उनको उधार की रायफल के लिए लाइसेंस मिल सकेंगे। यह व्यवस्था भारत सरकार के संशोधित गजट में की गई है, जिसके आधार पर राज्य सरकार की ओर से विस्तृत नियमावली और शासनादेश जारी होने का इंतजार है।
प्रशिक्षु शूटर बनने के लिए अब उधार की रायफल से काम चल जाएगा। उन्हें उधार की लाइसेंस के लिए डीएम से लाइसेंस लेना होगा। यह लाइसेंस प्राथमिकता से मिल सकेंगे, इसके लिए जिला क्रीड़ा अधिकारी या रायफल शूटिंग रेंज से प्रमाणपत्र लेना होगा। लाइसेंस के बाद उन्हें नई रायफल खरीदने की जरूरत नहीं होगी, वह किसी भी शूटर की रायफल उधार ले सकेंगे। नए नियमों में कनिष्ठ शूटर को अब साल में 15 हजार के स्थान पर 30 हजार कारतूस प्रैक्टिस के लिए मिल सकेंगे। यह शूटर एक समय में पांच हजार के स्थान पर 10 हजार कारतूस एक स्थान रख सकेंगे। रायफल क्लब और शूटिंग रेज से जुड़े सामान्य शूटर एक साल में 500 के स्थान पर एक हजार कारतूस ले सकेंगे। अर्जुन पुरस्कार विजेता साल में दो लाख कारतूस ले सकेंगे। इसी तरह अंतरराष्ट्रीय विजेता के लिए स्टाक सीमा एक लाख कारतूस निर्धारित की गई है। नए नियमों में एयर पिस्टल के लिए दस मीटर तक की शूटिंग रेंज के लिए लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी। इससे अधिक की मारक क्षमता वाली रेंज के लिए लाइेंस लेना होगा। इसी तरह 10 मीटर से अधिक की मारक क्षमता वाली एयरगन के लिए लाइसेंस अनिवार्य कर दिया गया है। इस बारे में भारत सरकार के गजट के आधार पर प्रदेश सरकार की ओर से नियमावली और शासनादेश तैयार किए जा रहे हैं। जिसके लिए रायफल क्लब और एसोसिएशन की ओर से सुझाव मांगे गए हैं। उन्हीं के आधार पर नए नियम बनाए जाएंगे।