शिक्षक नरेश गंगवार ने बताया कि विभाग तो यह दावा कर रहा है कि सभी स्कूलों को पूरी तरह से स्मार्ट कर दिया गया है, लेकिन अभी कई ब्लॉकों में कुछ स्कूल ऐसे हैं, जहां सिर्फ टीवी लगाई गई है, प्रोजेक्टर नहीं है। आधे-अधूरे संसाधनों को ही स्मार्ट क्लास का नाम दिया गया है।
शिक्षक शशिकांत का कहना है कि अधिकतर स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं काम चलाऊ स्थिति में हैं। बिजली आपूर्ति की समस्या अधिकतर स्कूलों में है। अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान हर स्थिति से अवगत कराया जाता है, लेकिन इस मामले में कुछ भी करने में विभाग भी असमर्थ है।
बीएसए संजय सिंह ने कहा कि लगभग सभी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं शुरू कराना बड़ा लक्ष्य था। विभाग ने इसे पूरा किया है। बिजली आपूर्ति की समस्या के समाधान के लिए भी जल्द हल निकाला जाएगा। इस बार कंपोजिट ग्रांट की राशि से स्कूलों में इन्वर्टर खरीदने पर विचार किया जा रहा है।