बरेली। मोबाइल फोन सहित अन्य डिजिटल उपकरणों के प्रति लगाव बच्चों और युवाओं को मानसिक कसरत से दूर कर रहा है। घरों में खाली समय बिताने का पसंदीदा जरिया रहे कैरम बोर्ड, शतरंज, लूडो आदि इंडोर गेम्स अब पिछड़ रहे हैं।
खेल उपकरणों के कारोबार से जुड़े दुकानदार विशाल ने बताया कि पहले शतरंज और कैरम बोर्ड की मांग रहती थी। बच्चे शाम को और छुट्टियों में इनसे ही मनोरंजन करते थे। घर के बड़े लोग भी इसमें शामिल होकर अनुभव साझा करते थे। इससे तार्किक क्षमता विकसित होती थी। हालांकि, अब यह विरासत कमजोर हो रही है। बच्चे-बड़े अब डिजिटल गेम्स से जुड़ रहे हैं। इस कारण वे साथ में समय भी कम बिता रहे हैं।
उन्होंने बताया कि तीन-चार साल पहले हर माह शतरंज के 90-100 सेट बिकते थे। अब यह संख्या 10-12 के बीच रह गई है। वहीं लूडो भी 15-20 ही बिक रहे हैं। इनमें से भी अधिकतर से स्कूल-कॉलेज में सप्लाई होते हैं।
नकटिया निवासी आरव ने बताया कि उनको मोबाइल फोन पर खेलने में ज्यादा मजा आता है। इस पर खेलने के लिए घर में किसी दूसरे इन्सान की जरूरत नहीं होती है। जयंत एन्क्लेव निवासी शिवन्या शर्मा ने कहा कि पहले कैरम बोर्ड और लूडो खेला था लेकिन अब फोन अच्छा लगता है। संवाद