बरेली। रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने चुनौती मूल्यांकन के लिए व्यवस्था में बदलाव तो कर दिया है लेकिन उसे लागू करने के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद नहीं हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि धीरे-धीरे व्यवस्था तैयार कर ली जाएगी।
चुनौती मूल्यांकन में इस बार छात्रों को मूल कॉपी के बजाय स्कैन कॉपी दी जानी है। मगर विश्वविद्यालय के सामने दिक्कत यह है कि इसके लिए पर्याप्त संख्या में स्कैनर और उसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षित स्टाफ भी चाहिए। अगर इसमें विलंब हुआ तो छात्रों को चुनौती मूल्यांकन के लिए इंतजार करना पड़ेगा। इसके आवेदन के लिए विश्वविद्यालय ने अभी पोर्टल भी नहीं शुरू किया है। छात्रों का कहना है कि कोरोना के चलते इस बार परीक्षा परिणाम भी देर से घोषित हुए हैं। अगर चुनौती मूल्यांकन में भी विलंब हुआ तो संशोधित परीक्षा परिणाम जारी करने में भी देरी होगी। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि चुनौती मूल्यांकन के लिए बहुत ज्यादा छात्र नहीं आते हैं। विश्वविद्यालय अपने स्तर से तैयारी कर लेगा।