रिजल्ट के बाद विक्ट्री का निशान दिखाते विद्यार्थी व शिक्षक
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डॉक्टर बनना ही मेरा लक्ष्य: यशस्वी कुमार
यशस्वी कुमार के पिता डॉ. राकेश कुमार राजश्री मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट, बरेली में प्रोफेसर हैं। उनकी मां एक गृहिणी हैं। यशस्वी ने कहा कि वह आगे चलकर डॉक्टर बनना चाहते हैं। फिलहाल होमी भाभा विज्ञान शिक्षा केन्द्र, मुंबई में रहकर अंतरराष्ट्रीय बायोलॉजी ओलंपियाड की तैयारी कर रहे हैं। इस प्रतियोगिता के टॉप 20 में उनका स्थान सुनिश्चित हो चुका है। पिछले साल कजाखस्तान में आयोजित इसी ओलंपियाड में यशस्वी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था और रजत पदक भी जीता था।
यशस्वी कुमार ने बताया कि मुझे पढ़ाई के साथ-साथ तैराकी का भी शौक है। राष्ट्रीय स्तर पर तैराकी प्रतियोगिताओं में भाग लिया है और कई पदक भी जीते हैं। हाल ही में नीट की परीक्षा भी दी थी, जो उम्मीद के मुताबिक नहीं गई। लेकिन हार नहीं मानी। उनका मानना है कि असफलता हमें कमजोर नहीं बनाती, बल्कि आगे बढ़ने की दिशा दिखाती है। जरूरी यह है कि हम अपनी गलतियों को पहचानें और उनका सुधार करें।
बैंक अधिकारी बनना है सपना- स्तुति
12वीं की टॉपर स्तुति वर्मा का कहना है कि वह आरबीआई ग्रेड बी परीक्षा उत्तीर्ण कर बैंक में अधिकारी बनना चाहती हैं। इसके लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही हैं। इनके पिता दिनेश कुमार, डीपीएस में पीजीटी कंप्यूटर साइंस के शिक्षक हैं और माता प्रतिभा श्रीवास्तव, नारायण ई-टेक्नो स्कूल में पीजीटी हिंदी हैं। स्तुति ने किसी भी कोचिंग संस्थान की सहायता नहीं ली। पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी के माध्यम से की। उनके अनुसार सफलता का सबसे बड़ा मंत्र है- निरंतर अभ्यास, मन लगाकर पढ़ाई करना और समय-समय पर उसे दोहराना।
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शिक्षकों और पिता के साथ यशिका गंगवार
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इस साल भी मिला रिजल्ट का सरप्राइज
जिले का परीक्षा परिणाम लगभग शत-प्रतिशत रहा है। बीते वर्ष की तरह इस बार भी छात्रों को रिजल्ट का सरप्राइज मिला। मंगलवार सुबह सीबीएसई की ओर से रिजल्ट की घोषणा हुई तो विद्यार्थियों में हलचल तेज हो गई। 12वीं का रिजल्ट 11:30 बजे तो 10वीं का दोपहर एक बजे के बाद जारी किया गया। दोनों ही परिणाम डिजिलॉकर पर जारी हुए हैं। एक साथ लोड बढ़ने पर सर्वर भी शाम तक धीमा रहा।
माता-पिता के साथ अद्विका
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बीते वर्ष के मुकाबले 12वीं के घट गए छात्र
बीते वर्ष के मुकाबले इस बार 10वीं की परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। वहीं, 12वीं में परीक्षार्थियों की संख्या घटी है। बीते वर्ष 10वीं में 8,400 विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी और इस बार 212 परीक्षार्थी बढ़ गए हैं। वहीं 12वीं में बीते वर्ष 6,800 परीक्षार्थी शामिल हुए थे। इस बार इसमें 194 की कमी दर्ज की गई।