एटीएम में पैसे ना होने पर छात्राओं को निराश जाना पड़ा।
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बरेली। बैंक कर्मचारियों की दो दिन की हड़ताल के बाद तीसरे दिन संडे पड़ने से एटीएम सेवा पूरी तरह धड़ाम हो गई है। 90 फीसदी से ज्यादा एटीएम कैशलेस हो जाने से लोगों को करेंसी संकट से जूझना पड़ा। गिने चुने एटीएम में कुछ कैश था भी, वहां ग्राहकों की लंबी लाइन लगी रही। दोपहर बाद तक वे भी खाली हो गए। एटीएम से नगद निकासी न हो पाने से बाजार पर भी इसका असर दिखाई दिया।
बैंक स्टाफ और आउट सोर्सिंग एजेंसियों ने गुरुवार को एटीएम में कैश डाला था। शुक्रवार और शनिवार को बैंक कर्मचारियों की हड़ताल की वजह से एटीएम में कैश नहीं डाला गया। हड़ताल के दूसरे दिन ही 70 से 80 फीसदी तक एटीएम खाली हो गए थे। तीसरे दिन रविवार की छुट्टी पड़ने के कारण एटीएम में कैश नहीं डाला गया। ऐसे में संडे को 90 फीसदी से ज्यादा एटीएम कैशलेस हो गए। जिन एटीएम में कुछ कैश बाकी था, वहां ग्राहकों की लंबी लाइन लगी रही। कुतुबखाना सब्जी मंडी अस्पताल रोड पर एटीएम पर लंबी लाइन लगी रही। एसबीआई कचहरी रोड पर कैश डिपॉजिट मशीन यानी सीडीएम में जितनी रकम जमा हो रही थी, लोगों को उतना ही कैश वापस मिल पा रहा है। पीलीभीत बाईपास, स्टेडियम रोड, सिविल लाइंस सहित शहर में तमाम हिस्सों में एटीएम सेवा पूरी तरह से लड़खड़ाई रही। बैंक अधिकारियों की लापरवाही यह रही कि हड़ताल खत्म होने के बावजूद कैश के संकट को देखते हुए उन्होंने एटीएम में नोटों की आपूर्ति के लिए न तो करेंसी चेस्ट खुलवाया और न कैश भरने के लिए आउट सोर्सिंग एजेंसियों की आपातकालीन सेवा ही ली। हालांकि हड़ताल से बाहर रहे आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, यस बैंक सहित अन्य निजी बैंकों के कुछ एटीएम में कैश होने से लोगों को कुछ राहत मिली।
30 फीसदी तक कारोबार में गिरावट, व्यापारियों के पास करोड़ों का कैश डंप
शुक्रवार से बैंकों में हड़ताल और एटीएम के खाली हो जाने से कारोबार में 25 से 30 फीसदी तक गिरावट आई है। व्यापारियों का कहना है कि कारोबार पहले से ही मंदी के दौर से गुजर रहा है। उस पर एटीएम खाली होने से नोटों के संकट से ग्राहकों की संख्या और भी ज्यादा कम हो गई है। कारोबारियों का कहना है कि बैंकों के बंद रहने करोड़ों का डंप पड़ा हुआ है। तीन दिन बाद सोमवार को बैंक खुलेंगे भी तो काफी भीड़ की वजह से भी वहां काम कराना आसान नहीं होगा।