बरेली। लोगों को राशन जैसी जरूरी चीजों की किल्लत न झेलनी पड़े, इसके लिए जिला प्रशासन ने तय किया था कि किराना और सब्जी की दुकानें सुबह सात से 11 बजे तक खुलेंगी लेकिन इन चार घंटों में भी लोगों के बीच दूरी रखने का कड़ाई से इंतजाम किया जाएगा लेकिन कारोबारी कमाई के लिए बाजार खुलने के तीन अतिरिक्त घंटों में लॉकडाउन के सारे नियम-कायदे टूट गए। दुकानें खुलते ही पूरे बाजार में ऐसी भीड़ टूटी कि कोरोना की दहशत पनाह मांगती दिखाई दी।
अमर उजाला की टीम बृहस्पतिवार को जब श्यामगंज बाजार पहुंची, तब सुबह के चार बज रहे थे। इस दौरान एक-एक कर दुकानों के शटर खुलने लगे थे। गलियों की दुकानों-गोदामों से लेकर मुख्य मार्ग की दुकानें खुलने तक उन पर काम करने वाले मजदूर रास्तों पर निगरानी की जिम्मेदारी निभाते हुए भी दिखे। कुछ देर बाद गुड़ मंडी की भी दुकानें खुल गईं और फिर श्यामगंज पुल के नीचे भी बाजार सज गया। बमुश्किल 20 मिनट के अंदर श्यामगंज का पूरा किराना बाजार खुल चुका था। साढ़े चार बजे तक जनरल स्टोर, कन्फेक्शनरी और राशन-मसालों की दुकानों पर सैकड़ों लोगों की भीड़ दुकानों पर उमड़ पड़ी। इसी के साथ सामाजिक दूरी की भी धज्जियां उड़ने लगीं। संक्रमण फैलने के जिस खतरे से राज्य से लेकर केंद्र तक सरकार हिली हुई है, उसका मामूली ख्याल तक न दुकानदारों में दिखा न सामान खरीदने के लिए मारामारी में जुटी भीड़ में। पूरा नजारा काफी भयावह था। सामान खरीदने के लिए लोग एक-दूसरे से चिपककर धक्कामुक्की तक करने में नहीं झिझक रहे थे। साढ़े चार बजे से सात बजने तक श्यामगंज बाजार में यही नजारा रहा। थाना बारादरी और श्यामगंज पुलिस चौकी से घिरे इस बाजार में पुलिस कहीं ढूंढे भी नहीं मिली।
दुकानदारों की भभकी, जो सामान चाहिए अभी खरीद लो, क्या पता सील हो जाए पूरा शहर
एक दिन पहले ही बुधवार दोपहर पूरा जिला सील होने की अफवाह फैलने के बाद बाजारों में लूट मच गई थी। हालांकि बाद में यह साफ हो गया कि यह महज अफवाह थी लेकिन बृहस्पतिवार को भी श्यामगंज बाजार में दुकानदार इस अफवाह से लोगों को डराकर ज्यादा से ज्यादा सामान खरीद लेने के लिए उकसाते दिखे। किसी को अगर कोई वैराइटी पसंद नहीं आ रही थी तो उसे भी धमका रहे थे कि लेना है तो यही ले लो वर्ना बाद में यह भी नहीं मिलेगा।
प्रिंट रेट पर जहां मिले वहां खरीद लेना
लॉकडाउन में लगने वाले तीन घंटों के इस बाजार में कालाबाजारी की सीमाएं भी टूटती रहीं। ज्यादातर दुकानदार थोक में सामान की खरीददारी करने वालों को भी जमकर चूना लगाते रहे। कोई रियायत देना तो दूर, उनसे प्रिंट रेट से भी ज्यादा कीमत की वसूली की जा रही थी। कोई एतराज कर रहा था तो सामान रखवाकर सीधी धमकी दे रहे थे कि जहां प्रिंट रेट पर सामान मिले, वहीं से खरीद लेना। साफ जाहिर था कि थोक में महंगा खरीदा गया सामान गली-मोहल्लों की दुकानों पर फुटकर में और महंगा बेचा जाएगा। प्रशासन की कालाबाजारी न करने की चेतावनी भी लॉकडाउन की तरह धूल चाटती दिखाई दी।
बात हो गई है.. सात बजे से पहले नहीं आएगी पुलिस
एक दुकानदार से सुबह चार बजे दुकान खोल लेने के बारे में सवाल किया तो जवाब मिला कि लॉकडाउन के नियम सुबह सात बजे से लागू होते हैं। रात में दुकान खुलने से कोई लॉकडाउन नहीं टूटता है। पूछा, अगर पुलिस ने आकर लाठीचार्ज कर दिया तो.. इस पर जवाब मिला कि पुलिस से बात किए बगैर थोड़े ही दुकान खोल ली है। यह सब तो चलता रहता है। पुलिस से सात बजे तक का समय मिला है। सात बजने से पहले ही दुकानें बंद हो जाती हैं। भरोसा जमाने के लिए दुकानदार ने यह भी तर्क दिया कि थाना बारादरी और श्यामगंज चौकी बगल में ही है। आप क्या समझते हैं, क्या उन्हें बाजार खुलने की भनक नहीं है।
एलन क्लब मंडी में भी शुरू हुआ श्यामगंज वाला फार्मूला
लॉकडाउन में भी कारोबारी स्वार्थ पूरे करने का जो फार्मूला श्यामगंज बाजार में चल रहा है, बृहस्पतिवार को उसका असर एलन क्लब मंडी में भी दिखाई दिया। एक शख्स मंडी में घुसने लगा तो उसे वहां तैनात पुलिस वाले ने रोक दिया। उसने बताया कि घर के लिए सब्जी खरीदनी है तो पुलिस वाले ने कहा जल्दी खरीदकर छह बजे से पहले चले जाओ। इसके बाद कोई रियायत नहीं होगी, सीधे कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि एलन क्लब मंडी में भी प्रशासन की ओर से सिर्फ थोक खरीददारी करने की मंजूरी है। लेकिन थोक खरीददारी सुबह छह बजे के बाद शुरू होती है, उससे पहले यहां से कोई भी सब्जी खरीद ले जाता है।
डेलापीर और कुतुबखाना मंडी में भी भीड़
शहर की सबसे बड़ी डेलापीर सब्जी और फल मंडी रात दो बजे ही खुल जाती है। दो बजे से थोक और चार बजे के बाद फुटकर दुकानदारों की आवाजाही शुरू होती है। पुलिसकर्मी यहां भी तैनात रहते हैं लेकिन उनका जोर सिर्फ मास्क और सैनिटाइजर पर रहता है बजाय इसके कि फुटकर दुकानदारों को रोककर सिर्फ थोक दुकानदारों को अंदर आने दिया जाए। इसी वजह से सुबह छह बजे तक मंडी में खासी भीड़ उमड़ती है। सात बजे पुलिस लाठियां फटकार कर मुस्तैदी का प्रमाण देने लगती है।