नाजरीन ने बताया कि बदायूं में कई साल से साजिद और जावेद हेयर सैलून चला रहे थे। साजिद ने ऐसा क्यों किया, यह वह नहीं जानतीं। न तो घर में कोई लड़ाई-झगड़ा हुआ, न ही कोई और बात बताई तो कैसे कहें कि ऐसा कृत्य क्यों किया। दोनों मासूमों की मौत का दर्द जीवन भर रहेगा। अपने बेटे की मौत का दुख नहीं है। कहा, पुलिस ने उसके साथ जो किया, उसका उन्हें कोई मलाल नहीं है। उसने जैसा किया, उसके साथ भी वैसा ही हुआ है।
मां नाजरीन बोलीं- साजिद की पत्नी गर्भवती नहीं
साजिद के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसकी मां नाजरीन बेबस तो दिखी, लेकिन उनकी आंखों में आंसू नहीं थे। मां नाजरीन ने बताया कि साजिद की पत्नी के दो बेटे हुए, दोनों की मौत हो गई थी। अब उसके कोई संतान नहीं है। उसकी पत्नी गर्भवती भी नहीं है। फिर उसने बहाना बनाकर रुपये क्यों मांगे। नाजरीन ने जावेद को घटना के समय घर पर होना बताया। अब जावेद कहां है, इस सवाल पर वह कुछ नहीं बोलीं।
पंचनामा भरने के लिए भी पांच लोग बमुश्किल मिले
आरोपी को पुलिस ने तीन घंटे के अंदर ही मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। बुधवार की सुबह नौ बजे तक पोस्टमार्टम कराने के लिए पांच लोग पंचनामा भरने तक को नहीं पहुंचे। पुलिस ने मोहल्ले के लोगों को बमुश्किल बुलाया, तक कहीं जाकर पंचनामा की कार्रवाई हो सकी। लोग पंचनामा भरवाने से भी डर रहे थे। पुलिस ने जैसे-तैसे पंचनामा की कार्रवाई करा पोस्टमार्टम कराया। साजिद को गांव के ही कब्रिस्तान में पुलिस फोर्स की निगरानी में सुपर्द-ए-खाक कर दिया गया है।
मठभेड़ में साजिद को लगी थीं तीन गोलियां
पुलिस मुठभेड़ में मारे गए साजिद के शव का पोस्टमार्टम बुधवार को कराया गया। मुठभेड़ में साजिद को तीन गोलियां लगी थी। दो गोली उसके सीने में लगी हैं और एक गोली उसके पेट में साइड में लगी है। मुख्य हत्यारोपी साजिद के पोस्टमार्टम के दौरान पुलिस पीएससी मौजूद रही। उसके शव को पुलिस की सुरक्षा में ही गांव सखानू ले जाया गया।
कस्बा सखानू का रहने वाला था साजिद
मुख्य आरोपी साजिद अलापुर थाना क्षेत्र के कस्बा सखानू का रहने वाला था। उसकी दुकान ठेकेदार विनोद ठाकुर के घर के सामने सड़क के दूसरी ओर है। वह करीब दो साल से बाबा कॉलोनी में अपनी बाल काटने की दुकान चला रहा था। विनोद के तीनों बच्चे अक्सर उसकी दुकान पर बाल कटवाने जाते थे, जिससे साजिद का उनके घर आना जाना था।
मोहल्ले वालों का कहना है कि वैसे तो साजिद रोजाना रात के नौ-दस बजे अपनी दुकान बंद करके सखानू जाता था लेकिन मंगलवार शाम करीब चार बजे ही अपनी दुकान बंद करके चला गया। इस पर मोहल्ले वालों को आश्चर्य भी हुआ था।