शिक्षामित्रों के समायोजन के खेल में बेसिक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र स्वरूप सचान बुरी तरह फंसे थे। पहले चरण में काउंसलिंग कर 62 अतिरिक्त शिक्षामित्रों का समायोजन कर लिया गया था। मनचाहे स्कूल बांट दिए गए। शिकायत जब शासन तक पहुंची तो जांच कराई गई। इसमें बीएसए दोषी पाए गए थे। बताया तो यह भी जा रहा है कि कई ऐसे स्कूलों में शिक्षकाें की तैनाती कर दी गई, जो सूची में थे ही नहीं। बीएसए देवेंद्र स्वरूप सचान का बरेली से तबादला ऐसे ही नहीं हुआ। एक साल पहले बीएसए के खिलाफ काफी शिकायतें हुई थीं लेकिन जब एक स्थानीय नेता के साथ बीएसए की तल्खी बढ़ी तो पुरानी शिकायताें के आधार पर इनका तबादला बरेली से बाहर डायट उन्नाव कर दिया गया।
रेवड़ी की तरह बांट दिए स्कूल
शिक्षामित्र मनीषा को पहले सिरसा स्कूल मिला। काउंसलिंग के बाद में उसे करगैना कर दिया। बिथरी चैनपुर परातासपुर में एक शिक्षक का पद था। बाद में यहां दो नियुक्ति नियम के विपरीत कर दी गई। इसकी भी शिकायत हुई थी।
यह था मामला
पहले चरण की काउंसलिंग में 1212 शिक्षामित्रों का समायोजन करना था लेकिन किया गया 1274 का। बाद में 273 पद प्रमोशन से खाली हुए। यहां पहले से ही 62 पद भरे हुए थे। विरोध हुआ तो आनन-फानन में 62 पद 273 में घटाने पड़े और 211 पर ही समायोजन हुआ। 580 पदाें पर समायोजन को लेकर जिले में कोई हवा नहीं थी। सचिव संजय सिन्हा से शिकायत के बाद पदाें पर नियुक्ति पत्र बांटे गए।