टिकट कटने पर नया चेहरा उम्मीदवार के रूप में आने की चर्चा जोरों पर है। इसके अलावा महापौर उमेश गौतम, शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक हरिशंकर गंगवार, चिकित्सा प्रकोष्ठ के जिला संयोजक डॉ. विजय गंगवार का नाम भी दावेदारों के रूप में चल रहा है।
मुस्लिम चेहरे पर दांव लगा सकती है बसपा
बसपा के प्रत्याशी को लेकर भी असमंजस है। पार्टी से मुस्लिम चेहरा सामने आने के कयास लग रहे हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा प्रत्याशी घोषित होने के बाद ही बसपा अपने पत्ते खोलेगी।
वैसे पिछला बार सपा-बसपा में गठबंधन था और यहां से सपा कोटे से भगवत सरन गंगवार संयुक्त उम्मीदवार थे। चूंकि इस बार पार्टी ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है, इसलिए प्रत्याशी को लेकर रहस्य ज्यादा गहराया हुआ है। वैसे पार्टी से जुड़े लोगों की मानें तो इस बार यहां से दो मुस्लिम सहित पांच दावेदार मुख्य रूप से सक्रिय हैं। अब टिकट किसकी झोली में गिरेगा, यह समय तय करेगा।
फिलहाल पार्टी के नाम पर हो रही तैयारी
टिकट घोषित न होने से दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ता व नेता शांत हैं। आपस में ही गुणा-गणित लगाकर टिकट दिलवा रहे हैं। कोई किसी का टिकट पक्का बता रहा है तो किसी का। साथ ही पार्टी के नाम पर लोगों को अपने पक्ष में लामबंद कर रहे हैं। भाजपा की बूथ स्तर तक चुनाव प्रबंधन को लेकर बैठकें जारी हैं। चुनाव प्रबंधन कमेटी भी गठित हो गई है। वहीं बसपा में भी संगठन की ओर से पार्टी की स्थिति मजबूत करने के प्रयास हो रहे हैं। वैसे दोनों पार्टियों के नेता अब जल्द ही प्रत्याशी घोषित होने की उम्मीद जता रहे हैं।
आंवला में भी बसपा उम्मीदवार का इंतजार
बरेली ही नहीं, बसपा ने आंवला सीट पर भी अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। हालांकि भाजपा से वर्तमान सांसद धर्मेंद्र कश्यप को फिर से उम्मीदवार बनाए जाने और सपा-कांग्रेस गठबंधन की ओर से नीरज मौर्य के उतरने से सीट हथियाने की जाेर-आजमाइश दोनों प्रतिद्वंद्वियों में शुरू हो गई है। लोगों को इंतजार है तो तीसरे प्रमुख प्रत्याशी का। वैसे पिछली बार यहां सपा-बसपा गठबंधन के संयुक्त उम्मीदवार के रूप में रुचिवीरा प्रत्याशी के रूप में मैदान में थीं। इस बार पार्टी के अकेले उम्मीदवार के रूप में यहां से कई दावेदार मैदान में हैं।