हर दिन हो रहा है लाखों रुपये का मिलीभगत से कारोबार
बरेली। दिमाग भी आखिर ऐसी घटनाएं कब तक याद रखे कि दिल्ली में एक पिज्जा ब्वाय ने ही 70 से ज्यादा लोगों को कोरोना का संक्रमित बना दिया था। चटकारों की आदी जबान से उठने वाली तरंगें दिमाग में पहुंचीं तो लोगों को सतर्क रखने वाली इस तरह की सारी याददाश्त गड़बड़ा गई। दिल और दिमाग के बीच कुछ यही खेल चलते-चलते शहर में मिठाई और चाट का कारोबार बड़े पैमाने पर शुरू हो गया।
मिठाई, जलेबी, छोले-भठूरे, खस्ता पूड़ी और समोसे जैसी चीजों की तलब पूरी करने के लिए तमाम दुकानें सुबह जल्दी खुलने के बाद चंद घंटों में पूरे दिन का हिसाब करके बंद हो जाती हैं। मिठाई के जो ब्रांड शहर में छाये हुए थे, उनके शोरूम तो अब भी लॉकडाउन की वजह से बंद हैं, लेकिन उन्होंने ऑनलाइन कारोबार के तौर पर इसका विकल्प ढूंढ लिया है। मिठाई और दूसरी ऐसी चीजों को हालांकि शासन ने गैरजरूरी चीजों की श्रेणी में रखते हुए उनके कारोबार पर रोक लगाई हुई है, लेकिन एफएसडीए के अफसरों और पुलिस से उन्होंने ग्रीन सिग्नल ले लिया है लिहाजा सबकुछ सामने होते हुए भी कहीं कोई अड़चन नहीं आ रही है। हर रोज ये दुकानें लाखों का कारोबार कर रही हैं।
सुबह-सुबह दुकानों पर टूटता है लॉकडाउन
मिठाई और नाश्ते की नामचीन दुकानें गली-मोहल्लों और कॉलोनियों में भी हैं। सुबह-सुबह जब ये दुकानें खुलती हैं तो उन पर भीड़ टूट पड़ती हैं और लॉकडाउन देखते ही देखते हवा हो जाता है। बड़ा बाजार, श्यामगंज, पीलीभीत बाईपास, प्रेमनगर, सुभाष नगर जैसे इलाकों में मिठाई के शोरूम पर ऑनलाइन बुकिंग करके घर बैठे डिलीवरी दी जा रही है। घर बैठे गरमा-गरमा भठूरा, पूड़ी, जलेबी, समोसा, लौज, रबड़ी जैसी चीजें मंगाने वालों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।
शोरूम पर ताला, काम आ रहा घर और गोदाम
देसी घी की मिठाई बनाने का दावा करने वाले कारोबारी गोदाम और अपने घरों पर ऑर्डर के मुताबिक माल तैयार करा रहे हैं। सराफा बाजार की एक देसी घी की मिठाई बनाने वाली दुकान सुबह होते ही खुल जाती है। दोपहर होने से पहले तक इस पर अच्छी-खासी भीड़ जुटती है। श्यामगंज में एक गली में देसी घी का गरम नाश्ता, इमरती, बालूशाही ऑनलाइन बुकिंग के बाद उपलब्ध कराया कराई जाती है।
लॉकडाउन में मिठाई का कारोबार पूरी तरह प्रतिबंधित है। बुधवार को कुछ कारोबारी प्रशासनिक अधिकारियों से मिलने गए थे, तब भी साफ कर दिया गया था कि शासन के निर्देश के बगैर अनुमति देना संभव नहीं। अगर कोई चोरी छुपे कारोबार कर रहा है तो वह अवैध है और उन पर पुलिस और प्रशासन के अफसर कार्रवाई कर सकते हैं।- डीआर मिश्रा, जिला अभिहित अधिकारी