वायरल हुए वीडियो से उजागर हुए कोविड अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अफसरों की लापरवाही भरी करतूत
26 नवंबर को अस्पताल की दूसरी मंजिल के एक कमरे में डंप मिले थे हजारों सैंपल
विभाग में अफरा-तफरी, सीएमओ ने सीएमएस को पद से हटाया, प्रकरण की जांच शुरू
बरेली। कोरोना के सर्वश्रेष्ठ प्रबंधन के दावे की करीब महीने भर से लगातार धज्जियां उड़ रही हैं। पिछले दिनों कोरोना के दस हजार से ज्यादा सैंपलों की जांच न कराने का मामला सामने आया था, अब एक वायरल वीडियो में जिले के स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष अफसर कोरोना सैंपलों से भरे कंटेनरों को निहायत असुरक्षित ढंग से जूतों से कुचलते और कर्मचारियों के हाथों उन्हें बोरों में भरवाते दिखाई दे रहे हैं।
मामला तीन सौ बेड कोविड अस्पताल का है जहां स्टोर रूम में पहले 17 और फिर 26 नवंबर को बड़े पैमाने पर कोरोना की जांच के लिए दिए गए सैंपल कंटेनरों में डंप मिले थे। 17 नवंबर को मिले सैंपलों की संख्या दस हजार से ज्यादा थी। इसके बाद 26 नवंबर को भी सैंपलों की वायलों से भरे करीब सौ कंटेनर एक कमरे में डंप पाए गए। अफसरों ने इनकी गिनती कराने के बाद 85 बॉक्स खाली होने का दावा किया था। अफसरों ने आधिकारिक तौर पर यह तो स्वीकार किया था कि 15 बॉक्स में रखे सैंपलों को जांच के लिए नहीं भेजा गया लेकिन इसके लिए किसी की जवाबदेही तय नहीं की लिहाजा स्टाफ को इधर-उधर करने के अलावा कोई कार्रवाई भी नहीं हुई।
इसके बाद यह दावा जरूर किया गया कि खराब हुए सैंपलों को इन्फेक्शन प्रिवेंशन प्रोटोकॉल के तहत नष्ट किया जाएगा लेकिन मंगलवार को वायरल हुए एक वीडियो में वीभत्स नजारों ने अफसरों की करनी और कथनी के फर्क की पोल खोलकर रख दी। इस वीडियो में कोविड अस्पताल के सीएमएस डॉ. सतीश चंद्रा के साथ पूर्व सैंपलिंग इंचार्ज डॉ. सीपी सिंह समेत कई और अफसर और कर्मचारी हजारों सैंपलों को अपने जूतों से कुचलते दिख रहे हैं। सैंपल को जूतों से कु चलकर उनके टुकड़े किए गए जिसके बाद कर्मचारियों से उन्हें एक पॉली बैग में भरवाया गया।
वीभत्स... असुरक्षित, स्टाफ से नंगे हाथों बोरे में भरवाईं टूटी-फूटी सैंपल वॉयल
सैंपलों से भरा खुला बोरा बायो मेडिकल वेस्ट के साथ प्लांट पर भिजवाया
वीडियो में जो नजारा दिख रहा है, उसने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ डॉक्टरों के डॉक्टर होने पर भी सवाल खड़ा कर दिया। शुरू से आखिर तक इस वीडियो में कई नजारे बेहद वीभत्स हैं। पहले तो अफसर खुद कई कर्मचारियों के साथ सैंपल भरे बॉक्सों को जूतों से कुचलते दिखाई दे रहे हैं, इसके बाद जब सारे वॉयल चकनाचूर हो गए तो उन्हें कर्मचारियों से नंगे हाथों पॉली बैग में भरवा दिया। वीडियो में कर्मचारी नंगे हाथों टूटे सैंपल बॉक्स और वॉयलों को उसमें भरते दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों की लापरवाही यहीं खत्म नहीं हुई। टूटे-फूटे सैंपल वॉयलों से भरा खुला पॉली बैग बायो मेडिकल वेस्ट ले जाने वाले वाहन में लाद दिया गया और उसे बायो वेस्ट प्लांट पर भिजवा दिया गया।
सैंपल में वायरस जीवित होने की संभावना कम फिर भी खतरनाक
वैसे तो विभिन्न सतहों पर कोरोना वायरस कई दिन तक जीवित रह सकता है लेकिन कुछ निजी डॉक्टरों का कहना है कि प्रिजर्व किए जाने के बाद अगर कोल्ड चेन को बरकरार न रखा जाए तो कोरोना वायरस का तीन दिन से ज्यादा जीवित रहना मुश्किल है। चूंकि जूतों से कुचलकर नष्ट किए गए सैंपल करीब 10-12 दिन तक पुराने थे लिहाजा उनमें वायरस के जीवित होने की संभावना नही है लेकिन फिर भी सैंपल नष्ट करना खतरनाक है और मेडिकल प्रक्रिया के अनुरूप भी नहीं है।
वीडियो ने खोली पोल तो मची अफसरों में रार कोविड अस्पताल से हटाए गए सीएमएस
बरेली। वीडियो वायरल होने के बाद सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने कोविड अस्पताल के सीएमएस डॉ. सतीश चंद्रा को हटा दिया है। हालांकि सीएमओ इस बात से इनकार किया कि यह कार्रवाई सैंपलों को जूते से कुचलकर नष्ट किए जाने की वजह से की गई है लेकिन डॉ. सतीश ने यह कहकर उन्हें और एडी हेल्थ डॉ. सुधीर गर्ग समेत कई और वरिष्ठ डॉक्टरों को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है कि सैंपल उन सबकी मौजूदगी में कुचले गए।
कोविड अस्पताल के फ्लू कॉर्नर पर हजारों सैंपलों को डंप कर बर्बाद कर दिए जाने के मामले का 17 नवंबर को खुलासा होने के बाद सीएमओ ने सैंपलिंग इंचार्ज डॉ. सीपी सिंह को हटाकर डॉ. सतीश चंद्रा को प्रभार सौंपा था। 26 नवंबर को दोबारा हजारों सैंपल बरबाद करने का मामला सामने आने के बाद कोविड अस्पताल के सीएमएस डॉ. पवन कपाही को हटाकर सैंपलिंग इंचार्ज डॉ. सतीश को प्रभारी सीएमएस बना दिया गया। अब जो नया वीडियो वायरल हुआ है, उसमें खुद डॉ. सतीश चंद्रा सैंपलों को कुचलते दिखाई दे रहे हैं।
मंगलवार को सीएमओ ने डॉ. सतीश चंद्रा को सीएमएस पद से हटाकर डीएसओ डॉ. आरएन गिरी को प्रभारी सीएमएस बना दिया। इसके बाद डॉ. सतीश चंद्रा ने न सिर्फ सैंपलों को खुद कुचलने की बात कबूल कर ली बल्कि यह कहकर सनसनी फैला दी कि सैंपल और कन्टेनर बॉक्स को जूतों से कुचलने के दौरान सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह, एडी हेल्थ डॉ. सुधीर गर्ग, पूर्व सीएमएस डॉ. पवन कपाही, नोडल अफसर डॉ. अखिलेश्वर सिंह, पूर्व सैंपलिंग इंचार्ज डॉ. सीपी सिंह भी मौजूद थे।
हालांकि उन्होंने यह भी सफाई दी कि सैंपलों को बगैर तोड़े फेंक ना मुमकिन नहीं था इसीलिए कुचलकर उन्हें तोड़ा गया था। एडी हेल्थ डॉ. सुधीर गर्ग और सीएमओ डॉ. बलवीर सिंह ने डॉ. सतीश चंद्रा के आरोपों को गलत बताते हुए इस मामले की जानकारी होने से ही इनकार किया है। सीएमओ ने कहा कि इस प्रकरण की जांच में सच सामने आ जाएगा।
जांच में पहले भी संदिग्ध पाई गई थी अफसरों की भूमिका मगर सीएमओ ने कार्रवाई नहीं की
नए सीएमएस बने डॉ. आरएन गिरी और आईडीएसपी इंचार्ज डॉ. अनुराग गौतम को ही पहले सैंपल बरबाद करने के मामले की जांच सौंपी गई थी। दोनों ने इस जांच में अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध बताया था मगर सीएमओ डॉ. बलबीर सिंह ने इसके बावजूद कार्रवाई के नाम पर स्टाफ के प्रभार बदलकर मामला रफा-दफा कर दिया। बेहद गंभीर मामला होने के बावजूद कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की गई। अब सैंपलों को जूतों से कुचलने की भी जांच शुरू कराई गई है, हालांकि इसका भी कोई नतीजा सामने आने की संभावना कम ही मानी जा रही है।
वीडियो वायरल होने की मुझे कोई जानकारी नहीं है। यह विभाग के बारे में दुष्प्रचार की कोशिश है। अब एसीएमओ डॉ. आरएन गिरी ही कोविड चिकित्सालय के सीएमएस का प्रभार संभालेंगे। - डॉ. बलवीर सिंह, सीएमओ
सैंपल और बॉक्स को उच्चाधिकारियों की मौजूदगी में तोड़ा गया था। उस दौरान सभी मौजूद भी थे। वीडियो में जो लोग दिख रहे हैं, उनके अलावा भी कई लोग पीछे की ओर खड़े थे। - डॉ. सतीश चंद्रा, सीएमएस