बरेली। पांच करोड़ के बजट से रिठौरा कस्बे में निर्मित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का भवन धूल फांक रहा है। अनदेखी का आलम यह है कि परिसर में ग्रामीण मधुमक्खी पालने लगे हैं। छुट्टा पशु इसमें चरते रहते हैं। अराजक तत्वों ने इसे अपना अड्डा बना लिया है।
नगर पंचायत रिठौरा के मरीजों को इलाज के लिए करीब 15 किमी दूर स्थित नवाबगंज सीएचसी या फिर बरेली शहर स्थित जिला अस्पताल की दौड़ लगानी पड़ती है। सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों की मांग पर नगर पंचायत के वार्ड धर्मपुर में सीएचसी की स्वीकृति हुई और बजट स्वास्थ्य विभाग को जारी हो गया। वर्ष 2016-17 में निर्माण शुरू हुआ।
वर्ष 2020 तक हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी कर इसे संचालित किया जाना था, पर कोरोना महामारी से कार्य प्रभावित रहा। वर्ष 2022-23 में निर्माण पूरा हुआ, पर संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है। वहां निगरानी की भी कोई व्यवस्था नहीं है। खाली परिसर में ग्रामीणों ने मधुमक्खी पालन के बॉक्स रख लिए हैं। उनके पशु भी दिन भर परिसर में उगी घास चरते नजर आते हैं। दीवारों का प्लास्टर भी टूटकर गिरने लगा है।
अव्यवस्था की शासन स्तर पर हो रही शिकायत
स्थानीय नागरिकों के मुताबिक, वे दो साल से स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों और शासन को पत्र भेज रहे हैं। सुनवाई न होने पर अब आईजीआरएस पर भी शिकायत की है। अगर अफसर चेत जाएं तो मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।
इन भवनों को भी संचालन का इंतजार
वर्ष 2018 में करीब सौ करोड़ के बजट से निर्मित तीन सौ बेड अस्पताल का संचालन भी अभी शुरू नहीं हो सका है। मानव संसाधन न मिलने से करीब 20 करोड़ के बजट से खरीदे गए उपकरण पर धूल की परत जम रही है। वर्ष 2023 में जिला अस्पताल के पुराने परिसर में ट्राॅमा विंग का निर्माण पूरा हो चुका है, पर मानव संसाधन और बजट के इंतजार में यह भवन भी धूल फांक रहा है।
सीएमओ बोले- हस्तांतरण हो गया, पर मैपिंग बाकी
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह का कहना है कि भवन का हस्तांतरण हो चुका है, पर बगैर मैपिंग संचालन नहीं किया जा सकता है। जरूरी प्रक्रिया पूरी कर जल्द सीएचसी का संचालन शुरू कराया जाएगा। परिसर में जो लोग अतिक्रमण कर रहे हैं, उन्हें हटाने के निर्देश दिए गए हैं। तीन सौ बेड अस्पताल और ट्राॅमा विंग संचालन के लिए मानव संसाधन की मांग शासन से की जा रही है। अमर उजाला ब्यूरो