यह नारा सोशल मीडिया के जरिए हिंदुस्तान पहुंचा, लेकिन फर्क यह है कि हिंदुस्तान जम्हूरी देश है, जहां ऐसे नारे लगाना जायज नहीं है। बैठक में मौलाना मुजाहिद हुसैन, मौलान नूर अहमद अजहरी, मुफ्ती मजहर इमाम, मौलाना शाकिर अली, मुफ्ती तौकीर अहमद, मौलाना ताहिर फरीदी, मुफ्ती अतीक मिस्बाही, सूफी हनीफ जहांगीरी, कारी सगीर अहमद रजवी, मौलाना खुर्शीद अहमद आदि उलमा मौजूद थे।