मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के बयान का किया समर्थन, कहा- विवाद की वजह बनती हैं ऐसी शादियां
बरेली। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से गैर मुस्लिमों से निकाह को नाजायज करार दिए जाने का बरेलवी उलमा ने भी समर्थन किया है। मरकजी दारुल इफ्ता और दरगाह आला हजरत के इस्लामिक रिसर्च सेंटर से जुड़े उलमा का कहना है कि गैर मजहब के युवक या युवती से निकाह शरीयत के मुताबिक ठीक नहीं है और विवाद का कारण भी बनता है। लिहाजा इससे बचना चाहिए।
ऐसी शादी की इजाजत नहीं देता इस्लाम
किसी भी गैर मुस्लिम युवक या युवती की शादी मुस्लिम से नहीं हो सकती। इसी तरह किसी मुस्लिम युवक या युवती की शादी गैर मुस्लिम से नहीं हो सकती। इस्लाम इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं देता। लव जेहाद जैसी कोई सोच इस्लाम में नहीं है। गृहमंत्री रहते हुए राजनाथ सिंह भी संसद में इसका खंडन कर चुके हैं। अगर कोई मुस्लिम हिंदू लड़की से शादी करता है तो यह सिर्फ उसका काम है। उसे इस्लाम के मुकद्दस जेहाद से जोड़ना सरासर गलत है। लव जेहाद के नाम पर लोगों में नफरत का बीज बोने की कोशिश की जा रही है। - मुफ्ती नश्तर फारुखी, मरकजी दारुल इफ्ता दरगाह आला हजरत
मुस्लिम समाज के लिए निहायत नुकसानदायक
इस तरह की शादियां मुस्लिम समाज के लिए निहायत नुकसानदायक हैं। इससे परिवार का ताना-बाना बिखरने के सिवा और कुछ नहीं होता। बच्चों की तालीम और तरबियत पर भी गहरा असर पड़ता है। न उन्हें दिशा मिल पाती है और न दशा। रोज झगड़े और तकरार होते है। मेरी हिंदू और मुसलमान दोनों समुदाय के लड़के-लड़कियों से अपील है कि वे अपने समुदाय में ही शादी करें ताकि शरई तकाजे बने रहें और समाजी तौर पर भी वे लानत और मजम्मत के शिकार न हों। ऐसे निकाहों को नाजायज करार देने का मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का फैसला सही है। - मौलाना शहाबुद्दीन, अध्यक्ष इस्लामिक रिसर्च सेंटर दरगाह आला हजरत
पर्सनल लॉ बोर्ड का फैसला स्वागत योग्य
सभी धर्मों की तहजीब और रहनसहन का तरीका अलग होता है। इस्लाम में मुस्लिम समाज का रहन-सहन शरीयत के मुताबिक होता है लिहाजा गैर मजहब में शादी जायज नहीं है। बेहतर होगा कि यह बात हम अपने घरों में बच्चों को बताएं। हालांकि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड उम्मीद के मुताबिक काम नहीं कर रहा है लेकिन उनका यह बयान स्वागत योग्य है। - मुफ्ती साजिद हसनी कादरी, इस्लामिक स्कॉलर