बरेली। ग्यारह सालों में न जाने कितने एक्सप्रेस वे का निर्माण इतिहास बनकर राजनीतिक दलों की उपलब्धियों में दर्ज हो गया लेकिन लखनऊ हाईवे की बर्बादी का खामियाजा सिर्फ उस पर गुजरने वालों के खाते में ही है। दो सरकारों के कार्यकाल से भी ज्यादा वक्त गुजरने के बाद भी इस हाईवे का सफर अब भी डरावना है। सैकड़ों करोड़ फूंकने के बावजूद देश और प्रदेश की राजधानियों जोड़ने वाले इस हाईवे पर कदम-कदम पर हादसे का खतरा तो है ही, हुलासनगरा क्रॉसिंग पर पूरे-पूरे दिन लगने वाला जाम और भी भयावह है।
निर्माण एजेंसियों की ओर से सड़क पर छोड़ा गया मलबा और गड्ढों की वजह से पहले से खतरनाक लखनऊ हाईवे इस बरसात के बाद और ज्यादा दुर्दशाग्रस्त हो गया है। इन्वर्टिस तिराहे से फरीदपुर की ओर जाने वाले हाईवे की एक लेन लंबे समय से बंद पड़ी है। इस लेन पर सड़कों से निकला कई ट्रक मलबा एजेंसी ने डालकर छोड़ दिया है। आगे फरीदपुर तिराहे के पास बरसात में गहरे गड्ढे हो गए हैं। सड़क लगातार उधड़ रही है और कई जगह इस कदर बजरी बिखरी हुई है कि दोपहिया ब्रेक मारते ही फिसल जाते हैं। भारी वाहन गुजरते हैं तो गिट्टियां उछलती हैं। फरीदपुर में हाईवे के अंडरपास के ऊपर बैरीकेडिंग नहीं की गई है। सड़क से लगी मिट्टी बैठ चुकी है। वाहनों के अंडरपास से नीचे पलटने का खतरा साफ दिखता है।
हुलासनगरा क्रॉसिंग जिसे पार करने में अक्सर बरेली से लखनऊ के पूरे सफर से ज्यादा वक्त लग जाता है, उसके भी दोनों ओर करीब एक-एक किलोमीटर तक बेशुमार गड्ढे है। ये गड्ढे भी जाम का मुख्य कारण बन रहे हैं। इन गहरे गड्ढों से बचने के लिए वाहन सड़क पर बेतरतीब ढंग से गुजरते हैं। हुलासनगरा पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज से सौ मीटर पहले सड़क के नीचे की मिट्टी बह गई है। यहां भी वाहनों का निकलना बेहद मुश्किल भरा है।
एक साल से बहगुल पुल की सड़क की मरम्मत नहीं
बरेली-सीतापुर हाईवे पर बहगुल नदी के ऊपर सड़क के बीच एक हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था जिसके बाद एक साल से अधिक समय गुजर चुका है। एनएचआई के अफसरों ने अब तक उस हिस्से की मरम्मत नहीं कराई है। उस टूटे हिस्से के आसपास बड़े पत्थर, सीमेंट से भरी बोरी और टिन शेड लगाकर घेराबंदी कर दी गई है। यहां भी वाहन सिर्फ एक लेन पर गुजरते हैं और जाम की समस्या और बढ़ जाती है।
11 साल में कभी चले ही नहीं इमरजेंसी कॉल बाक्स
हाईवे पर किसी आपात स्थिति में मदद के लिए संचार का अहम साधन माने जाने वाले इमरजेंसी कॉल बॉक्स (ईसीबी) स्थापित किए गए थे। इसका फ ायदा यह है कि हाईवे पर यात्रा करने वाले वाहन चालक वाहन के टूटने, दुर्घटना या किसी अन्य समस्या पर ईसीबी पर कॉल बटन दबाकर हेल्प डेस्क से संपर्क कर सकते हैं। हालात यह हैं कि 11 साल बीत जाने के बावजूद ये ईसीबी चालू नहीं हो सके हैं।
टायर फटे तो ड्राइवर के कटते हैं पैसे
बरेली से ट्रक में सल्फर भरकर ले जा रहे हरजीत सिंह ने बताया कि कई सालों से जाम तो अलग समस्या है, अफसर गड्ढे तक नहीं भरवा पा रहे हैं। इन गड्ढों की वजह से अक्सर गाड़ी के टायर फटते हैं। इससे गाड़ी का नुकसान होता है जिसका ड्राइवर को भुगतना पड़ता है। मालिक हमारे पैसे काट लेते हैं।
जाम में फंसकर बर्बाद होता है वक्त
सीतापुर में पीएसी के कर्मचारी नकटिया में रहने वाले बृजेश कुमार बताते हैं कि बस से आते समय हर बार कई घंटे जाम में फंसना तय होता है। परिवार के साथ निजी गाड़ी से जाने पर इन जाम और गड्डों से बचने के लिए लिंक रोड जैतीपुर या कसरक मार्ग से होकर जाना पड़ता है, उसमें समय बहुत खराब होता है।
क्रॉसिंग पार करना खुशकिस्मती की बात
इंडेन गैस सर्विस का सप्लाई ट्रक चलाने वाले मनोज ने बताया कि क्रॉसिंग से समय से गुजर जाना उनके लिए खुशकिस्मती की बात होती है। जाम में फंसने पर दुर्घटना होने का खतरा हमेशा बना रहता है। ट्रक कई वाहनों के बीच फंसा होता है। घंटों के जाम के बीच लोग सड़क पर आकर खड़े हो जाते हैं। ट्रक को बहुत सावधानी से चलाना होता है।
हम लोगों के लिए ये हाईवे नरक का द्वार
राजाराम रुद्रपुर से बरेली होते हुए शाहजहांपुर तक नियमित जाते हैं। ट्रक से माल लोड कर रुद्रपर से यहां लाते हैं। कहा, यहां जाम में फंसना लगभग रोज की बात है। कई बार पूरी रात यहीं जाम में गुजर जाती है। ट्रक चालक तो सड़क पर आकर नींद भी मार लेते हैं। अब तो यहां से नियमित गुजरने वाले लोग इसे नरक का द्वार कहने लगे हैं।
सरकार ने टैक्स लेकर दिए हैं गड्ढे
ट्रक चालक हरजीत सिंह पंजाब से कोलकाता का महीने में एक चक्कर लगाते हैं। बरेली के इसी रूट से जाते हैं। कहते हैं, सरकार सिर्फ टैक्स ले रही है और इसके बदले में हमें गड्ढे दे रही है। टैक्स न दो तो गाड़ी का चालान हो जाता है और टैक्स देकर इस सड़क पर वाहन चलाने से गाड़ी की फिटनेस तीन महीने भी नहीं टिकती है। हमारा ध्यान किसी को नहीं है।
गड्ढे नहीं पुलिस भी परेशान करती है
फरहान ट्रक पर व्यापारियों का माल लेकर लखनऊ-दिल्ली आते-जाते हैं। महीने में दस से अधिक चक्कर लगाते हैं। बताते हैं, इस हाईवे पर पुलिस और गड्ढे दोनों परेशान करते हैं। गाड़ी को गड्ढों से बचाने में लगे रहते हैं और खुद को पुलिस से बचाने में।
जाम में ही लग जाता नोएडा जितना समय
शमशेर व्यापारियों का माल लेकर नोएडा से शाहजहांपुर आते हैं। बोले, हर बार जितना कुल समय शाहजहांपुर से नोएडा आने में लगता है, उतना ही समय यहां जाम में लग जाता है। चलते समय आने-जाने में लगने वाले समय में दोगुना मानकर चलते हैं।