समय कम है, अब नहीं होती पहले वाली साधना
युवा पीढ़ी के लिए उन्होंने कहा कि नृत्य एक साधना है, जो इसको पूरी तरह से अपना ले वही इसको निखार सकता है। पहले के जमाने में रिकॉर्डिंग की सुविधा नहीं थी। एक-एक प्रस्तुति की तैयारी में कई दिन लगते थे और जब नृत्य पेश किया जाता था तो एक से डेढ़ घंटे कोई नहीं रुकता था। अब प्रस्तुति 15 मिनट में सिमटकर रह गई है। पहले सोलो प्रस्तुतियां कार्यक्रम की जान होती थीं। अब ग्रुप को महत्व दिया जाता है।
दिल्ली में हुई थी गुरु जितेंद्र महाराज से मुलाकात
विश्व प्रसिद्ध कथक गुरु जितेंद्र महाराज बरेली की शान थे। उन्होंने करीब 77 वर्ष तक नृत्य सिखाया। बरेली में वह त्रिवटीनाथ मंदिर में नृत्य साधना करते थे। इस साल फरवरी में उनका निधन हुआ। उनकी शिष्य नलिनी-कमलिनी ने बताया कि उनकी मुलाकात जितेंद्र महाराज से दिल्ली में हुई। कई साल वहां रहकर उन्होंने महाराज से नृत्य सीखा और विश्व भर में नाम कमाया।