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Year Ender 2023: बरेली को गुजरते साल में मिला कम... गिला ज्यादा; ये योजनाएं हैं अधूरी

Thu, 28 Dec 2023 02:26 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली के विकास को लेकर बड़े-बड़े वायदे हुए। दावे भी किए गए, लेकिन गुरजते साल में मिला कम और गिला ज्यादा रहा। कुछ योजनाएं पूरी हुईं तो कई योजनाएं अधूरी रह गईं। 
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निर्माणाधीन स्काई वॉक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली शहर को स्मार्ट बनाने के सपने दिखाए गए थे। योजनाओं की फेहरिस्त भी लंबी थी। वायदे हुए थे। बड़े-बड़े दावे थे, लेकिन अंजाम अधूरा रहा। विदा हो रहे वर्ष 2023 में शहर का इंफ्रास्ट्रक्चर संवर न सका। यूं कहिए मिला कम, गिला ज्यादा रहा। स्मार्ट सिटी की मुख्य सड़कें तो ठीक हुईं, लेकिन गली मोहल्लों में गड्ढे साल भर दुखी करते रहे। लंबे इंतजार के बाद लाल फाटक पुल तो तैयार हुआ, लेकिन स्ट्रीट लाइट से रोशन न हो सका। बिलपुर और पिताबंरगंज रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज मंजूर हुए, लेकिन एनओसी न मिलने से अटक गए। स्मार्ट टॉयलेट का लोग उपयोग नहीं कर पाए। मल्टी स्टोरी पार्किंग, ई कियोस्क का संचालन नहीं हुआ। अर्बन हॉट, कुतुबखाना पुल और स्काई वॉक के लिए इंतजार बरकरार है। आइए जानते हैं हमें क्या मिला और क्या अधूरा रहा.. क्या सोचा था और कितना साकार हुआ?

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1- स्काई वॉक: अब तक अधूरा
शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए स्काई वॉक का निर्माण 15 अप्रैल 2022 को शुरू हुआ था। ये स्काई वॉक स्वचालित सीढ़ियों और लिफ्ट से लैस होगा। प्रोजेक्ट की लागत 11.18 करोड़ रुपये है। काम 30 सितंबर 2023 तक पूरा होना था, लेकिन नहीं हो सका। बाद में लक्ष्य 31 दिसंबर तय किया गया, लेकिन वह भी अब तक अधूरा है। अफसरों के दावे हवाई साबित हुए। अब नए वर्ष में स्काई वॉक में वॉक कराने की तैयारी है।

निर्माणाधीन कुतुबखाना पुल - फोटो : अमर उजाला
2- कुतुबखाना पुल: बार-बार निर्माण कार्य अटका
कोतवाली से कोहाड़ापीर तक 1307 मीटर लंबा कुतुबखाना पुल भी जाम से निजात दिलाने के लिए बन रहा है। सितंबर 2022 में काम शुरू हुआ था लेकिन 2023 में तय समय तक पूरा नहीं हो सका। स्मार्ट सिटी के अफसरों ने निजी फर्म को निर्माण का जिम्मा सौंपा है। प्रोजेक्ट 105.87 करोड़ रुपये लागत का है, लेकिन काम की रफ्तार धीमी है। राहगीरों के साथ ही व्यापारियों का इंतजार बढ़ रहा है। कारोबार का नुकसान हो रहा है। वहीं अफसरों ने फर्म को तीसरी बार समय सीमा में विस्तार दिया है।



3- अर्बन हाट एंड हैंडीक्राफ्ट सेंटर- संचालन के लिए अगले वर्ष का इंतजार
हैंडीक्रॉफ्ट सेंटर के साथ अर्बन हॉट बनाने के लिए 170.91 करोड़ रुपये की परियोजना पर 7 सितंबर 2021 को काम शुरू हुआ था। प्रोजेक्ट पूरा होने का लक्ष्य30 अक्तूबर 2023 तक था, लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ। विधान परिषद की लोक लेखा समिति ने हाल में ही परियोजना स्थल का दौरा किया तब नगर आयुक्त ने कहा कि इसे जल्द पूरा कराएंगे लेकिन संचालन को लेकर कोई तिथि नहीं बता पाईं।

4- चौपुला को अटल सेतु को जोड़ने के लिए 11 महीने रहा इंतजार
अटल सेतु को चौपुला पुल से जोड़ने के लिए सेतु निगम को 15 करोड़ रुपये न मिलने से वर्ष 2021 से काम ठप था। वर्ष 2023 में भी 11 महीने इंतजार में बीत गए। हर रोज हजारों लोग परेशान होते रहे। अमर उजाला ने मुद्दा बनाया तो शासन चेता और बजट जारी हुआ। टेंडर निकाले गए और काम शुरू होते-होते दिसंबर आ गया। अब सेतु निगम के महाप्रबंधक केएन ओझा का कहना है कि अगर कोई बाधा नहीं पड़ी तो मई तक काम पूरा हो जाएगा।

5- फोरलेन बना नहीं, सिक्स लेन के लिए नहीं मिली मंजूरी
मार्च 2023 में बड़ा बाईपास से पीलीभीत बाईपास के बैरियर टू तक 4.6 किलोमीटर हिस्से को फोर लेन करने के लिए शासन की व्यय वित्त समिति ने 76 करोड़ रुपये मंजूर किए थे। इसी बीच धनराशि जारी होने से पहले सेटेलाइट से बड़ा बाईपास तक मार्ग को 6 लेन करने का नया प्रस्ताव तैयार हो गया। सिक्स लेन के लिए 301 करोड़ रुपये बजट चाहिए था। चूंकि बजट अधिक था, इसलिए मंजूरी अटक गई। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने 19 मई 2023 को लोक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव अजय चौहान को पत्र भेजा था लेकिन न अब तक फोर लेन बना और न सिक्स लेन के लिए मंजूरी मिली। टू लेन में ही वाहन फंस रहे हैं।

6- भूमि अधिग्रहण न होने से अटका बरेली-सितारगंज का चौड़ीकरण
बरेली से बाया पीलीभीत सितारगंज तक 71 किलोमीटर मार्ग को टू लेन से फोर लेन किया जाना है। करीब 2857 करोड़ रुपये की लागत का यह प्रोजेक्ट बरेली से उत्तराखंड की बेहतर कनेक्टिविटी के लिए है। रास्ते में आठ बाईबास प्रस्तावित हैं। इसके लिए कार्यदायी संस्था चयनित हो चुकी है, लेकिन एक किलोमीटर मार्ग भी नहीं बन सका। एनएचएआई की ओर से कोई बाधा नहीं है। इसके लिए बजट की स्वीकृति पहले से है। इसके बावजूद बरेली, पीलीभीत और रुद्रपुर के राजस्व अधिकारी अभी तक भूमि अधिग्रहण पूरा नहीं कर सके हैं।

7- लाल फाटक पर अंधेरा कायम, रोशनी के इंतजार में बीता 2023
अप्रैल 2023 में शहर को लाल फाटक पुल की सौगात तो मिली है, लेकिन इस पर रात में अंधेरा रहता है। रोशनी के लिए 18 लाख रुपये से सेतु निगम ने स्ट्रीट लाइट लगाई हैं, लेकिन वह रोशन नहीं हो पा रहीं। क्योंकि सरकारी महकमे तय नहीं कर सके कि कौन बिजली का कनेक्शन लेगा और कौन उसके बाद लाइट के रखरखाव की जिम्मेदारी लेगा। स्थिति यह है कि डीएम से लेकर जिला पंचायत की एएमए और सेतु निगम के अभियंता तक सभी लगातार एक-दूसरे से पत्राचार कर रहे हैं। वहीं वाहन अंधेरे में गुजर रहे हैं।

8- बिलपुर और पितांबरपुर रेलवे क्रॉसिंग पर ओवरब्रिज निर्माण
बरेली-लखनऊ रेल पथ पर बिलपुर और पितांबरपुर रेलवे क्रॉसिंग पर 132 करोड़ की लागत से ओवरब्रिज स्वीकृत हुए हैं। पितांबरपुर रेलवे क्रॉसिंग (352 सी) पर 51 करोड़ रुपये व बिलपुर रेलवे क्रॉसिंग (344 ए) पर 81 करोड़ रुपये की लागत से पुल बनने हैं। इन प्रस्तावित पुलों के निर्माण का शिलान्यास लोक निर्माण मंत्री जितिन प्रसाद ने किया था, लेकिन अभी तक एक ईंट नहीं लगी। रेलवे से एनओसी न मिलने के कारण शिलान्यास के नौ महीने बाद भी निर्माण में बाधा बरकरार है। अफसर पत्र लिखने में व्यस्त हैं। जनता जाम से जूझ रही है। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने मंडल रेल प्रबंधक को पत्र भेजा है। सांसद धर्मेद्र कश्यप ने दिल्ली में उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक से मुलाकात की पर एनओसी अब तक नहीं मिल सकी।

9. बिजली आपूर्ति
बरेली जोन में बिजली सुधार के लिए 820 करोड़ रुपये की रीवैंप योजना लागू हुई है, लेकिन अधिकतर काम अधूरे हैं। समय पर कार्यदायी संस्था को सामान का आवंटन नहीं हो सका। रफ्तार सुस्त रही। पूरे वर्ष में 220 केवी का एक भी नया सब स्टेशन नहीं बन सका। सुभाषनगर के करीब में 220 केवी सब स्टेशन का निर्माण शुरू हुआ पर पूरा नहीं हुआ। अगर 2023 में शहर के भीतर 220 केवी का एक सब स्टेशन और बन गया होता तो फाल्ट और आपूर्ति की बाधा से मुक्ति मिलती। वर्ष 2023 की बात करें तो फाल्ट से 33 केवी की लाइनों पर कई ब्रेक डाउन हुए। कई इलाके आंधी और बारिश के समय अंधेरे में डूबे पर 33 केवी के फीडर छोटे करने पर काम नहीं हो सका। स्थिति यह है कि सिविल लाइंस के 220 केवी सब स्टेशन को छोड़कर सभी 33 केवी की लाइनें 16-17 किलोमीटर लंबी हैं। चुनौती बरकरार है। अधिशासी अभियंता पारेषण अनिल कुमार का कहना है कि मार्च 2024 तक 220 केवी का नया सब स्टेशन बन जाएगा। सुभाषनगर व मढ़ीनाथ क्षेत्रों के लोगों को राहत मिलेगी।

10. स्मार्ट टॉयलेट: ताले देखकर लौटते रहे लोग
स्वच्छता की रैकिंग और अधिकारियों के दावों में भले ही शहर में जनसुविधाओं का विकास हुआ, लेकिन हकीकत जुदा है। पूरे साल स्मार्ट टॉयलेट बनने के बाद भी संचालित नहीं हो सके। सार्वजनिक स्थलों पर 5.97 करोड़ रुपये की लागत से 12 स्मार्ट टॉयलेट अभी तक बंद पड़े हैं। अप्रैल 2023 में अधिकतर का निर्माण पूरा हो गया था। सिर्फ फिनिशिंग के काम रह गए थे, लेकिन अभी तक पूरे नहीं हुए। टॉयलेट में ताले लटके हैं। लोग ताले और आसपास फैली गंदगी देखकर लौट जाते हैं। नगर निगम के अधिकारी कहते हैं कि संचालन के लिए फर्म का चयन होना है। चयन होते ही टॉयलेट खुल जाएंगे।

नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने बताया कि स्काई वॉक का निर्माण अंतिम दौर में है। दिसंबर के अंत तक यह काम पूरा हो जाएगा। नए साल में शहरवासी उस पर वॉक करते दिखेंगे। कुतुबखाना के संबंध में कार्यदाई संस्था से बात की गई है। दिसंबर के अंत तक उन्हें काम पूरा करना था, मगर यह काम जनवरी 2024 के अंत तक पूरा हो जाएगा। नए साल में शहर के लोगों के लिए यह भी सौगात होगी। कुतुबखाना पुल शुरु होने से शहर की यातायात व्यवस्था और बेहतर हो जाएगी। आमजन को राहत मिलेगी। अर्बन हॉट का काम पूरा ही हो चुका है। इसके संचालन के लिए टेंडर निकालने की प्रक्रिया चल रही है। इसका संचालन होने से हस्तशिल्प और व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र नाथ नगरी को मिल जाएगा। टॉयलेट और पार्किंग तैयार हैं। संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है।
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लोक निर्माण विभाग के मुख्य अभियंता संजय तिवारी ने बताया कि सेटेलाइट से बड़ा बाईपास मार्ग के चौड़ीकरण के लिए प्रयास जारी हैं। साल 2023 में अहम काम हुए हैं। लाल फाटक से बदायूं रोड तक 38 करोड़ रुपये की लागत से चौड़ीकरण करके मार्ग को फोर लेन कर दिया गया है, अब सिर्फ डिवाइडर बनना है। मार्च 2024 तक फाइनल कोट और डिवाइडर का काम पूरा हो जाएगा। हजारों वाहन रफ्तार भरेंगे। पुवायां-निगोही-तिलहर-जैतीपुर-दातागंज मार्ग का साढ़े सात किलोमीटर हिस्सा बरेली जिले में है, जिसे 30 करोड़ 81 लाख की लागत से सात मीटर चौड़ा किया गया है। उमरसिया, इचौलिया होते हुए बुखारा-फरीदपुर मार्ग को सात करोड़ रुपये खर्च करके साढ़े पांच से सात मीटर चौड़ा कर दिया गया है।
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