फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार शुक्ला ने शनिवार को भमोरा के एक गांव के 75 साल उम्र के अशफाक अहमद उर्फ अल्लारक्खा को तीन साल की मासूम बच्ची का गुनहगार करार देते हुए उसे सात साल कैद की सजा सुनाई।
अशफाक पर पड़ोसी की बेटी को दुलार करने के बहाने अपने घर की छत पर ले जाकर दुष्कर्म की कोशिश करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। अदालत ने उस पर 20 रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
भमोरा इलाके के गांव में रहने वाले मासूम के पिता ने अशफाक अहमद के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी। रिपोर्ट के मुताबिक अशफाक की दुकान उन्हीं की दुकान से सटी हुई है। बराबर में ही दोनों के घर हैं। उनकी तीन साल की बेटी अक्सर दुकान पर आ जाती थी, 65 साल का अशफाक अक्सर उसे गोद में उठाकर दुलार करने की कोशिश करता था लेकिन उसकी हरकतें कुछ ऐसी थीं कि उन्होंने उससे अपनी बेटी को कुछ भी खिलाने-पिलाने या दुलार करने से मना कर रखा था।
इसके बावजूद एक अक्तूबर 2010 को शाम साढ़े चार बजे अशफाक उनकी नजर बचाकर उसे बंदर दिखाने के बहाने अपनी छत पर ले गया। कुछ ही देर बाद वह भी कुछ लोगों के साथ पीछे-पीछे उसकी छत पर पहुंचे तो उन्होंने अशफाक को नग्नावस्था में अपनी बेटी के साथ दुष्कर्म करने की कोशिश करते हुए पाया।
उन्होंने पहले अशफाक के बेटे जावेद से शिकायत की, लेकिन जब उसने उल्टे उन्हीं के साथ गालीगलौज की तो उन्होंने थाने जाकर अशफाक अहमद और उसके बेटे जावेद के खिलाफ तहरीर दे दी।
अदालत में करीब 10 साल तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सरकारी वकील सुरेश बाबू साहू ने 11 गवाहों को पेश किया। सबूतों और गवाही के आधार पर अदालत ने अशफाक को तीन साल की बच्ची का गुनहगार माना।