बरेली। रोडवेज बसों में लगेज के नाम पर हो रहे बंदरबांट की ओर अब अधिकारियों का ध्यान गया है। एक साल में कॉमर्शियल लगेज ढोने के मामलों में कोई कार्रवाई नहीं की गई, जब बेटिकट यात्रा के मामले में एआरएम निलंबित हुए तो जिम्मेदार नींद से जागे। अब उनको इसकी याद आई है। आरएम दीपक चौधरी ने चारों डिपो के एआरएम को बसों में काॅमर्शियल लगेज की निगरानी के निर्देश दिए हैं। बिना व्यापारी के सामान मिलने पर उसे जब्त करने व चालक-परिचालक पर कार्रवाई करने की बात कही है।
बरेली में बस स्टैंडों पर निगरानी के लिए भी जिम्मेदारी तय कर दी है। अब तक रोडवेज बसों में चालक-परिचालक लगेज तो ढो रहे थे, लेकिन राजस्व के नाम पर निगम को कुछ नहीं मिल रहा था। चार की जगह एक क्विंटल लगेज दिखाकर धन का बंदरबांट कर लिया जाता था। रोडवेज बसों में सफर के दौरान यात्री अधिकतम 25 किलो तक सामान ले जा सकते हैं। इससे ज्यादा होने पर टिकट का नियम है।
बसों की छत पर लगेज न रखा जाए, इसके लिए सीढि़यों को हटवाया जा चुका है। बस के भीतर भी लगेज रखने की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके बावजूद चालक-परिचालक बिना व्यापारी के ही लगेज ले जाते हैं। लगेज ढोने का सबसे ज्यादा काम आगरा, हल्द्वानी, मुरादाबाद, मेरठ, कानपुर, रुद्रपुर रूटों पर होता है। परिचालक लगेज के बदले रुपये तो वसूल लेते हैं, लेकिन उसका टिकट भी नहीं बनाते। रूटों पर चेकिंग करने वाला स्टाफ भी लगेज के मामले में कोई कार्रवाई नहीं करता। उन्हें भी बंधी-बंधाई रकम मिल जाती है।