बरेली/भोजीपुरा। नेपाल के रास्ते हो रही नकली नोटों की तस्करी में दोनों मुख्य सरगना के फरार होने से अभी कई सवालों के जवाब फंस गए हैं। नेपाली तस्कर को पकड़ना भले ही मुश्किल हो पर स्थानीय सफेदपोश अफसार अली की गिरफ्तारी की उम्मीद में पुलिस और एसटीएफ की टीमें लगी हैं। इसके बाद धंधे की पूरी हकीकत सामने आ सकेगी।
एसटीएफ मेरठ इकाई काफी समय से सीमा पार से हो रही नकली नोटों की तस्करी पर इनपुट जुटा रही थी। बरेली यूनिट के साथ मिलकर टीम ने यह कार्रवाई अंजाम दे दी। इसमें आरोपियों से पूछताछ में पुलिस को काफी जानकारियां मिली हैं। पता लगा है कि नेपाल का सुरेश और भोजीपुरा के भैरपुरा खजुरिया का अफसार अली नेपाल के पोखरा की एक फैक्टरी में काम करते थे। करीब डेढ़ साल पहले इन लोगों का नकली नोट के धंधे से जुड़ाव हुआ। इसके बाद अफसार गांव लौट आया। सुरेश उसे नेपाल से नकली नोट मुहैया कराता था और वह उसे खपाता था।
बताते हैं कि लोगों को एक लाख के बदले तीन लाख रुपये देते वक्त भी होशियारी से ऊपर और नीचे असली नोट लगा लिए जाते थे। हालांकि ज्यादातर लोगों को यह पता होता था कि नोट असली नहीं हैं पर साल भर से वह नोट बेहिचक खपा रहा था। कस्बे के आसपास इलाके से लेकर दूसरे प्रांतों तक नोटों की सप्लाई अफसार कर चुका था। टीम अभी यह पता नहीं कर सकी हैं कि नोट बनाए कहां जाते थे। हालांकि इस बात के कयास लगाए जा रहे हैं कि पाकिस्तान या फिर नेपाल में नोट बनाकर पीलीभीत के रास्ते यहां भेजे जाते थे।
कार पर भाजपा का झंडा लगाता था अफसार
अफसार के बारे में जानकारी मिल रही है कि वह साल भर में ही काफी मालदार हो गया था। उसने एक पुरानी कार खरीद ली थी और उस पर भाजपा का झंडा लगाता था। वह खुद को भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा से जुड़ा बताता था पर टीम को इस बात के प्रमाण नहीं मिले कि वह वाकई किसी दल से जुड़ा था। माना जा रहा है कि आसपास के लोगों में रसूख कायम करने के लिए वह सत्तापक्ष के दल से अपना जुड़ाव बताता था।