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बाबू जी का आहवान चलना है अयोध्या

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कल्याण सिंह। - फोटो : amar ujala
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बाबू जी के नाम से जनता के बीच लोकप्रिय पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह से शहर के लोगों की तमाम यादें जुड़ी हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता गुलशन आनंद ने बताया कि जब श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन चल रहा था, तब शहर से तमाम लोग अयोध्या जाते थे। बाबूजी के आह्वान पर ढांचा विध्वंस से लेकर कार सेवा तक हर बार बरेली से लोगों का जत्था अयोध्या गया। आने-जाने के लिए बरेली-वाराणसी पैसेंजर ही सबसे मुफीद साधन थी। यही वजह थी कि कार सेवकों ने उसका नाम बदलकर अयोध्या पैसेंजर कर दिया था। अयोध्या चलने के लिए कारसेवकों को बस यह संदेश दिया जाता था कि बाबू जी का आह्वान है... बस इतने पर ही अयोध्या के लिए जत्थे रवाना हो जाते थे।
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बकौल गुलशन आनंद उस समय वह हिंदू जागरण मंच के जिलाध्यक्ष थे। बरेली से तत्कालीन महानगर महामंत्री गोवर्धन चतुर्वेदी के नेतृत्व में लोग अयोध्या गए थे। वहां गिरफ्तारी के दौरान जेल भर गई तो पुलिस ने लाठी चार्ज कर सबको दौड़ाया था। बताया कि बरेली के विकास में भी उनका काफी योगदान है। आंवला और फरीदपुर के डिग्री कॉलेज कल्याण सिंह की ही देन हैं।

‘हमने पार्टी बदली तो विरोध में नहीं किया चुनाव प्रचार’
पूर्व सांसद राजवीर सिंह के कल्याण सिंह से पारिवारिक संबंध थे। उनका कहना है कि बाबूजी हर पारिवारिक कार्यक्रम में उनके घर आए। उन लोगों के बीच 1970 से दोस्ती थी। राजवीर सिंह के बेटे धीरेंद्र वीर सिंह ने बताया कि भाजपा से नाराजगी के चलते 2004 में पापा ने सपा ज्वाइन कर ली और आंवला संसदीय सीट से चुनाव लड़ा। भाजपा की ओर से कल्याण सिंह को बरेली में चुनाव प्रचार के लिए भेजा गया, लेकिन उन्होंने पापा के खिलाफ आंवला में जनसभा करने से साफ मना कर दिया।
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राजवीर सिंह से मिलने सेंट्रल जेल पहुंचे थे
बुधौली निवासी कुंवर संजय सिंह बताते हैं कि उनके पिता राजन बाबू से बाबूजी की काफी नजदीकी थी। जब भी बरेली आते तो फरीदपुर में मिलकर आते थे। बताया कि मलूकपुर कांड के दौरान सत्यप्रकाश अग्रवाल और राजवीर सिंह का तत्कालीन एसपी सिटी से विवाद हो गया। इसके बाद उन लोगों को सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया। इसकी जानकारी होने पर कल्याण सिंह ट्रेन से फरीदपुर पहुंचे थे। तब संजय उन्हें अपनी एंबेसडर कार से लेकर सेंट्रल जेल पहुंचे थे। संजय सिंह ने बताया कि उनके बड़े भाई कुंवर महाराज सिंह भी कल्याण सिंह के आह्वान पर कार सेवा के लिए अयोध्या गए थे।

कल्याण सिंह में थी गजब की नेतृत्व क्षमता
पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार कहते हैं कि अटल जी और आडवाणी जी के बाद अगर कोई नेतृत्वकर्ता था तो वह कल्याण सिंह ही थे। उनके साथ बहुत सारी यादें जुड़ी हैं। श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर तमाम उपलब्धियों में उनका अहम योगदान रहा। उनका निधन अपूर्णनीय क्षति है।
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आज भी सहेज कर रखा है कल्याण सिंह का मफलर
बरेली। पूर्व मेयर कुंवर सुभाष पटेल ने बताया कल्याण सिंह कई बार बरेली आए थे। उन्हें गले में सफेद मफलर डालने का शौक था। सर्किट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान गले में पड़ा मफलर गंदा होने पर उन्होंने सुभाष पटेल के सफेद मफलर से उसे बदल लिया। याद के तौर पर पूर्व मेयर ने उस मफलर को आज तक सहेज कर रखा है। उन्होंने बताया पूर्व मुख्यमंत्री का यह मफलर अब उनके लिए धरोहर है। पटेल ने बताया कि सक्रिय राजनीति के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री का बरेली से खासा जुड़ाव रहा। वह दर्जनों बार बरेली आए थे। लालकृष्ण आडवाणी के अल्मोड़ा में हुए एक कार्यक्रम में भी वह उनके साथ ही कार से गए थे। भाजपा से अलग होकर नई पार्टी बनाने के दौरान भी शहर से उनका जुड़ाव कम नहीं हुआ। चुनाव की रणनीति बरेली में बैठ कर ही बनाई जाती। नई पार्टी के गठन के दौरान उनका निजी विमान भी कई दिनों तक पूर्व मेयर के यहां ही खड़ा रहा था।
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