बरेली। अस्तित फाउंडेशन ड्रामा ड्रॉपआउट्स की ओर से ‘आषाढ़ का एक दिन’ नाटक का मंचन दूसरे दिन रविवार को भी दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहा। नाटक के दौरान खचाखच भरे हाल में खामोशी यह महसूस करने के लिए मजबूर कर रही थी कि मानों हर दृश्य दर्शकों के मन की गहराई को स्पर्श कर रहा हो।
महाकवि कालीदास के जीवन आधारित दिल को छूने वाली इस कालजयी रचना के लेखक मोहन राकेश हैं। नाटक को अंबुज कुकरेती ने अपने भावनात्मक निर्देशन से प्रभावशाली बना दिया। नाटक के पात्र विलोम की गूढ़ता, कालिदास की मौन गहराई और मल्लिका की मार्मिकता दर्शकों को भीतर तक छू गई।
अंबिका के पात्र को इतनी संजीदगी से निभाया गया कि वह दर्शकों के मन में एक जीवित स्मृति छोड़ गया। नाटक में अभिनय करने वाले पात्रों में मल्लिका- शुभ्रा भट्ट भसीन, अंबिका- कमला घले, कालिदास- अमन गुप्ता, दंतुल- विजय कुमार सिंह, विलोम- लव तोमर, निक्षेप- मुनीश रतन, मातुल- पंकज कुमार मौर्य, अनुचर- आयुष अग्रवाल प्रियंगु मंजरी- सिद्धि रस्तोगी रहे।
मुख्य अतिथि एडीजी रमित शर्मा रहे। साथ ही दीपक भसीन, संदीप झावर, राजेंद्र गुप्ता, वीरेंद्र स्वरूप, आर्यन्त कालरा, शिविका आदि मौजूद रहे। संवाद