बरेली। निर्जल एकादशी मंगलवार को है। भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए यह व्रत किया जाता है। मोक्ष की प्राप्ति और परलोक सुधारने के लिए भी यह व्रत रखा जाता है।
सनातन धर्म की मान्यताओं के अनुसार, सूर्योदय से अगले दिन सूर्योदय तक के समय को एक दिन कहा जाता है। सूर्योदय होते ही व्रत का संकल्प लेने के बाद भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करते हुए लोग अपनी सामर्थ्य के अनुसार पूजा अर्चना करते हैं। उनकी प्रसन्नता के लिए हरि ओम मंत्र का जाप थकान होने तक करना चाहिए। शाम को भगवान विष्णु की आरती करनी चाहिए और उनको मानसिक रूप से थका मानते हुए शयन कराके स्वयं सोना चाहिए। सुबह उठकर नित्य कर्म करने के बाद एक बर्तन में जल या शिकंजी और खजूर की पत्तियों से बना पंखा किसी कन्या या ब्राह्मण को दान करना चाहिए। इसके बाद स्वयं जल पीकर और फल खाकर व्रत का पारायण करना चाहिए। पंडित राकेश पांडेय के अनुसार, भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए किए गए एकादशी व्रत से धन संबंधी चिंता दूर होती है और रोग दोष में लाभ होता है।