क्षेत्र के गांव उनई चपटा में शनिवार देर शाम दस साल के बच्चे को दर्जन भर आवारा कुत्तों ने बुरी तरह से नोचकर मार डाला। राहगीरों ने उसे बचाने की कोशिश की पर तब तक वह दम तोड़ चुका था। घटना से गांव में कोहराम मच हुआ है। देर शाम तक कोई अधिकारी गांव नहीं पहुंचा। इससे लोगों में गुस्सा था।
रमेश का पुत्र पुष्पेंद्र गांव के स्कूल में कक्षा दो का छात्र था। शनिवार शाम वह घर में खेल रहा था। गांव से एक किमी दूर प्राचीन शिव मंदिर पर श्रीमद्भागवत कथा चल रही थी। पुष्पेंद्र की मां सावित्री कथा सुनने गई थीं। पुष्पेंद्र को अचानक मां की याद आई। उसने अपने पिता को बताया और मां के पास जाने को अकेला ही चल दिया। पुष्पेंद्र महज आधा किमी दूर ही पहुंचा था कि अचानक झाड़ी से एक दर्जन आवारा कुत्ते निकल आये। उन्होंने घेरा तो वह सहम गया। जान बचाने को वह खेतों में दौड़ा पर कुत्तों ने पीछा करके उसे गिरा ही लिया। उन्होंने पुष्पेंद्र के शरीर को बुरी तरह से नोचा। उसके सिर के बाल तक नोच डाले। गले पर हमला किया जिससे पुष्पेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई। कुत्ते उसे घसीटते हुए पास के खेत में ले जा रहे थे। तभी बाइक से मंदिर से गांव की ओर जा रहे गांव के रोशन और वीरेंद्र ने यह हाल देखा। उन्होंने कुत्तों को भगाना चाहा तो कुत्तों ने एकबारगी उन पर भी हमला करने की कोशिश की। वीरेंद्र ने पास की झाड़ी से डंडा उठाकर कुत्तों को खदेड़ा। कुत्ते पुष्पेंद्र का शव को वही छोड़कर भाग गये। वीरेंद्र ने बाइक से जाकर गांव में यह मनहूस खबर सुनाई। गुस्साये ग्रामीण लाठी डंडे लेकर दौड़ पडे़। हालांकि उन्हें कुत्ते नहीं मिले। शव को गांव लाया गया। लाड़ले की मौत की खबर सुनकर उसकी मां कथा से बदहवास हालत में घर पहुंची और शव देखकर बेहोश होकर गिर पड़ी। देर शाम तक कोई भी अधिकारी गांव नहीं पहुंचा। हालांकि विभिन्न राजनैतिक दल के लोगों ने गांव पहुंचकर अफसोस जताया। बता दें कि बहेड़ी क्षेत्र में खूंखार हुए कुत्ते अब तक दस से ज्यादा बच्चों की जान ले चुके हैं। डेढ़ साल पहले इसी गांव में एक बच्ची को मार डाला था।
जिम्मेदार करते रहे ‘मंथन’, फिर एक बच्चा मर गया
- शर्मनाक सुस्ती से बहेड़ी में बेमौत मर रहे मासूम
- अबतक 11 बच्चों को कुत्तों ने मार डाला है तहसील में
- आखिर कौन सा अभियान चलवा रहा है प्रशासन
वाकई यह तो आपराधिक लापरवाही है। बहेड़ी के आदमखोर कुत्तों पर खूब शोर मचा...अभियान चलाने का नाटक भी साथ ही साथ चल रहा है। प्रमुख सचिव तक ने इस मुद्दे पर वीडियो कांफ्रेंसिंग में कुछ दिनों पहले चिंता जताई, डीएम भी गांवों में गए लेकिन हुआ क्या? एक बच्चे को तो फिर कुत्तों ने खा लिया। पब्लिक भी कह रही है...यह मंथन तो सिर्फ कागजी है। हकीकत में तो गांवों तक कोई पहुंचा ही नहीं।
बहेड़ी के मुहल्ला सकलैनी नगर में 18 अप्रैल को पांच साल के बच्चे आमिर को आदमखोर कुत्तों ने मारडाला था। इससे पहले 9 मासूमों को भी यह कुत्ते मार चुके थे। आमिर की मौत जब अखबारों की सुर्खियां बनीं तो अफसरों और नेताओं को अपनी जिम्मेदारी याद आई। बहेड़ी का मुद्दा तहसील से लखनऊ तक गूंजने लगा। सुस्त पड़ी पालिका ने जैसे तैसे कुत्ते पकड़ने का अभियान शुरू किया। नेताओं ने वहां पहुंचकर अब ऐसा नहीं होने देंगे..के नारे लगाए और फिर सभी अपने-अपने घरौंदों में बच्चों को उन्हीं के हाल पर छोड़कर लौट आए। प्रमुख सचिव ने वीडियो कांफ्रेंसिंग में वन विभाग को जिम्मेदारी देने के लिए मंडलायुक्त को कहा था कि पता लगाया जाए कि कुत्ते क्यों एग्रेसिव हो रहे हैं। फिर समस्या का समाधान किया जाए लेकिन उन्होंने भी शनिवार तक वन विभाग को पत्र नहीं लिखा था। प्रशासनिक अफसरों की जब बहेड़ी के आदमखोर कुत्तों पर पूछताछ कम हुई तो नीचे के अफसर फिर खुद ब खुद सो गए। इसी सुस्ती ने एक और जान ले ली।
जिम्मेदारों ने क्या कहा, यह भी जान लीजिए
वन विभाग के सचिव को पत्र लिखेंगे। उनसे मांग की जाएगी कि वाइल्ड लाइफ की टीम को बहेड़ी भेजकर जांच कराएं कि यहां के कुत्ते इतने एग्रेसिव क्यों हो रहे हैं। फिर वह टीम जांच कर इन कुत्तों को ले जाएगी- प्रमांशु कुमार, मंडलायुक्त
कुत्ता पकड़ने वाली टीम को ग्रामीण सहयोग करें। कल एक गांव में कुत्ता पकड़ने टीम गई थी। वहां करीब 15 खूंखार आवारा कुत्तों को पकड़ा था। लेकिन ग्रामीण टीम से भिड़ने लगे और पकडे़ गये कुत्तों को छुड़ा ले गये। अब ऐसा नहीं होगा अगर किसी ने टीम को रोका या कुत्ते छुड़वाने के लिए दबाव बनाया तो उनके खिलाफ पुलिस एक्शन लेगी। दूसरी बात मांस के अवशेष इधर उधर फेंकते अगर कोई पकड़ा गया तो उसको बख्शा नहीं जायेगा। इस मामले में नगर पालिका को सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिये जा रहे हैं- गौरव दयाल डीएम बरेली।
मुझे मासूम की मौत पर अफसोस है। गांव जाकर मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाया। पुलिस को शव का पीएम कराने के आदेश दिये- पारस नाथ मौर्या, एसडीएम बहेड़ी
ये आवारा कुत्ते हैं। इनके खिलाफ वन विभाग कोई अभियान नहीं चला सकता है। अगर ये जंगली कुत्ते होते तो वन विभाग एक्शन लेता लेकिन नगर पालिका की कुत्ता पकड़ने वाली टीम को पूरा सहयोग किया जा रहा है- ग्रीश जोशी, रेंजर वन विभाग।
बेहद दुखद घटना है। मासूम की मौत पर बेहद अफसोस है। मै इस वक्त दिल्ली में हूं। वापस आकर मृतक के परिजनों को ढांढस बंधाने गांव जाऊंगा। उसके बाद डीएम व एसडीएम से मिलकर इस अभियान को और तेजी के साथ चलाने को लेकर बात की जायेगी। अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी- अताउर्रहमान, विधायक बहेड़ी।
बेटे का शव देख बेसुध हो गए मां-बाप
बहेड़ी। पुष्पेंद्र चार भाई बहनों में सबसे छोटा था। उसका शव आंगन में रखा गया तो मां सावित्री और पिता रमेश बेसुध हो गए। बाद में रमेश खुद को कोस रहे थे कि जाने क्यों उसे अकेले मंदिर तक जाने दिया। सावित्री कह रही थीं कि सुबह से ही उनका मन जाने क्यों खटक रहा था। कहीं अनहोनी न हो जाये। दोपहर को स्कूल से आने के बाद पुष्पेंद्र ने बस एक रोटी ही खाई। दुकान से बिस्कुट लाकर देने की जिद की तो उसे पैसे देकर वह मंदिर चली गईं। ग्रामीणों में काफी गुस्सा था। वह कह रहे थे कि कुत्ते बच्चों पर लगातार हमले कर रहे हैं, प्रशासन कोई सुध नहीं ले रहा। बताया कि डेढ़ साल पहले कुत्तों ने गांव के मनसुख की नौ साल की बेटी ज्योति को नोचकर मार डाला था। वह दोपहर के वक्त पिता को खाना देने खेत पर जा रही थी।
दो मिनट रुके और चले गए एसडीएम
एसडीएम पारस नाथ मौर्या मासूम पुष्पेंद्र की मौत की सूचना पर रात करीब साढे़ आठ बजे उसके घर पहुंचे। दो मिनट रुककर अफसोस जताया। जब ग्रामीणों ने कुत्ता पकड़ने को लेकर सवाल दागे तो वह खामोशी से निकल आए।
नेताओं का लगा तांता
बहेड़ी। पुष्पेंद्र की मौत की खबर लगते ही भाजपा नेता व पूर्व विधायक छत्रपाल सिंह गंगवार गांव पहुंचे और अफसोस जताया। कारवां संस्था के संयोजक नवाब राशिद खां ने भी गांव जाकर इसे प्रशासन की लापरवाही करार दिया। बसपा नेता नईम अहमद ने भी सरकारी ढील की निंदा की। नगर पालिका चेयरमैन अंजुम रशीद ने मृतक के घरवालों को सांत्वना दी।
नगर में सिमटकर रह गया कुत्ता पकड़ो अभियान
आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए प्रशासन तब सतर्क हुआ जब 18 अप्रैल को नगर में मासूम आमिर को कुत्तों ने नोचकर मार डाला और अमर उजाला ने इसे लेकर समाचारीय अभियान चलाया। हालांकि कुत्ते पकड़ना सिर्फ नगर तक सीमित रहा। गांवों में टीम ने मूवमेंट से परहेज किया।
उल्हैतापुर में भी बच्ची पर हमला किया
बहेड़ी। गांव उल्हैतापुर में महेंद्र पाल की पुत्री नन्ही शनिवार देर शाम सरकारी नल से पानी भरने जा रही थी। अचानक उस पर आधा दर्जन आवारा कुत्तों ने हमला कर दिया। उसकी पीठ में नुकीले दांत गड़ा दिये तो मौजूद ग्रामीणों ने कुत्तों को खदेड़ा। उसे इलाज के लिए सीएचसी लाया गया। प्राथमिक उपचार और रैबीज का टीका लगाने के बाद उसे घर भेज दिया।
दो साल में कुत्तों ने ली 11 मासूमों की जान
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20 जनवरी 2014 - बंजरिया गांव के पास नौ साल के बच्चे को मार डाला।
20 जनवरी 2014- फरीदपुर टाउन एरिया में मजदूर के छह साल के बेटे को बनाया निवाला।
25 जनवरी 2014- अलसियाबोझ गांव में आठ साल के बच्चे को बनाया शिकार।
2 मई 2014- मोहम्मदपुर गांव में पांच साल के लड़के को कुत्तों ने मार डाला।
2 मई 2014- उनई चपटा गांव में ही नौ साल की बालिका ज्योति को कुत्तों ने मार डाला।
12 जुलाई 2014- भाटिया फार्म में 11 साल के किशोर को मार डाला।
7 अगस्त 2014- नवायल गांव में दस साल के अशोक बना शिकार।
3 सितंबर 2014- आदलपुर गांव में बच्ची को नोचकर मार डाला।
27 दिसंबर 2015- दसयाठेरी गांव में दस साल के बच्चे को बनाया शिकार।
18 अप्रैल 2016- सकलैनी नगर मोहल्ले में पांच साल के बच्चे आमिर को मार डाला।
14 मई 2016- उनई चट्टा गांव में दस साल के पुष्पेंद्र की कुत्तों ने जान ले ली।