चुनौतियां
नई शिक्षा नीति के तहत शहर के सौ फीसदी बच्चों को निपुण लक्ष्यों से जोड़ना बड़ी चुनौती है। स्कूलों से शिक्षकों और बच्चों की गैरहाजिरी चिंता का सबब है। कायाकल्प के लिए भी अभी और कोशिश किए जाने की जरूरत है। विभाग को सत्र शुरू होने पर समय से किताबें पहुंचाने की दिशा में पहल करनी होगी। सत्र के आधे से ज्यादा समय बच्चे बिना किताबों के पढ़ते हैं। यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के लिए दी जाने वाली सहायता राशि बच्चों तक समय से पहुंचाना जरूरी है।
अखबार बताता रहा बोर्ड परीक्षा का परिणाम
अब एक क्लिक पर बोर्ड परीक्षा का परिणाम अपलोड हो जाता है। आज से कई साल पहले तक परिणाम अखबार में देखा जाता था। वक्त के साथ तमाम तब्दीलियां हुईं। अखबारों की जगह कैफे ने ले ली। फिर स्मार्ट फोन परिणाम बताने लगे। बोर्ड के कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि परिणाम निकलने के दौरान पूरा दिन उनकी ड्यूटी अखबार के दफ्तर में लगा करती थी। अखबार उस दिन किसी बेहतर नेटवर्क क्षेत्र वाले कैफे से कम न था।
पोलियो से मुक्ति के लिए अभियान में निभाई अहम भूमिका
शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों ने न केवल बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि पोलियो से मुक्ति के लिए अभियान में भी अहम भूमिका निभाई। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने घर-घर जाकर पांच साल तक के बच्चों को ओरल पोलियोरोधी वैक्सीन दिया। इससे लाखों बच्चों को पोलियोमाइलिटिस से बचाया जा सका।