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Bareilly: कमल-दवात पुरानी बात... अब लगती है स्मार्ट क्लास, पढ़ें- शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों का सफर

Tue, 17 Jan 2023 05:43 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

अमर उजाला बरेली के स्थापना दिवस पर हम बता रहे हैं कि 54 वर्षों में बरेली ने शिक्षा के क्षेत्र में क्या-क्या हासिल किया। शहर ने सैकड़ों स्कूल कॉलेज हासिल किए। सीखने और पाने का दौर भी जारी है। स्याही-दवात से सालों पहले शुरू हुआ सफर अब स्मार्ट क्लास तक पहुंच चुका है
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अब लगती है स्मार्ट क्लास (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बरेली ने शिक्षा के क्षेत्र में 54 वर्षों में काफी बदलाव देखे हैं। इस दौरान शहर ने सैकड़ों स्कूल कॉलेज हासिल किए। सीखने और पाने का दौर भी जारी है। स्याही-दवात से सालों पहले शुरू हुआ सफर अब स्मार्ट क्लास तक पहुंच चुका है। हर युवा के पास स्मार्ट फोन पहुंचा तो शिक्षा आसान और सर्वसुलभ बन गई। तकनीकी ने विभागीय कार्यवाही को भी आसान और पारदर्शी बनाया। 

बदलाव जो मील का पत्थर साबित हुए 

- 1971 में वेतन वितरण अधिनियम आने पर शहर के एडेड विद्यालयों में तैनात शिक्षकों ने हर्ष जताया। इस अधिनियम के बाद एडेड के शिक्षकों को सरकार की ओर से वेतन दिया जाने लगा। 
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- 1981 में शहर में माध्यमिक शिक्षा परिषद का मंडलीय कार्यालय बना। कार्यालय में 1986 से काम की शुरुआत हुई। इसके साथ ही बोर्ड संबंधित प्रशासनिक कार्यों में सुविधा होने लगी। 

उपलब्धियां

सर्व शिक्षा अभियान, समग्र शिक्षा अभियान, स्कूल चलो अभियान आदि अभियानों से साक्षरता दर सत्तर फीसदी के करीब पहुंच गई। शहर को 54 सालों में 2483 परिषदीय विद्यालय और 433 माध्यमिक विद्यालय मिले। फट्टे पर चलने वाली कक्षाओं ने बढ़िया फर्नीचर को अपनाया। जीवन स्तर में बदलावों के साथ-साथ शैक्षिक स्तर भी सुधरा। बच्चों तक बुनियादी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए नई शिक्षा नीति के तहत निपुण लक्ष्य जारी किए गए। अब तक जिले के 78 फीसदी विद्यालय निपुण लक्ष्य हासिल कर चुके हैं। इस साल इन्हें सौ फीसदी विद्यालयों में पहुंचाने का लक्ष्य विभाग की ओर से रखा गया है। आज जिले के 1696 विद्यालयों में स्मार्ट कक्षाएं संचालित हैं।
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चुनौतियां

नई शिक्षा नीति के तहत शहर के सौ फीसदी बच्चों को निपुण लक्ष्यों से जोड़ना बड़ी चुनौती है। स्कूलों से शिक्षकों और बच्चों की गैरहाजिरी चिंता का सबब है। कायाकल्प के लिए भी अभी और कोशिश किए जाने की जरूरत है। विभाग को सत्र शुरू होने पर समय से किताबें पहुंचाने की दिशा में पहल करनी होगी। सत्र के आधे से ज्यादा समय बच्चे बिना किताबों के पढ़ते हैं। यूनिफॉर्म और स्टेशनरी के लिए दी जाने वाली सहायता राशि बच्चों तक समय से पहुंचाना जरूरी है।

अखबार बताता रहा बोर्ड परीक्षा का परिणाम

अब एक क्लिक पर बोर्ड परीक्षा का परिणाम अपलोड हो जाता है। आज से कई साल पहले तक परिणाम अखबार में देखा जाता था। वक्त के साथ तमाम तब्दीलियां हुईं। अखबारों की जगह कैफे ने ले ली। फिर स्मार्ट फोन परिणाम बताने लगे। बोर्ड के कार्यालय में तैनात कर्मचारियों ने बताया कि परिणाम निकलने के दौरान पूरा दिन उनकी ड्यूटी अखबार के दफ्तर में लगा करती थी। अखबार उस दिन किसी बेहतर नेटवर्क क्षेत्र वाले कैफे से कम न था।  

पोलियो से मुक्ति के लिए अभियान में निभाई अहम भूमिका

शहर के आंगनबाड़ी केंद्रों ने न केवल बुनियादी शिक्षा के क्षेत्र में बल्कि पोलियो से मुक्ति के लिए अभियान में भी अहम भूमिका निभाई। आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने घर-घर जाकर पांच साल तक के बच्चों को ओरल पोलियोरोधी वैक्सीन दिया। इससे लाखों बच्चों को पोलियोमाइलिटिस से बचाया जा सका।
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