फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्कर्ष के 55 वर्ष: सरोकारों से जुड़े... विकास की राह पर आगे बढ़े; बरेली में बदलाव का साक्षी है अमर उजाला

Wed, 17 Jan 2024 01:26 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

बरेली शहर की रंगत बदलती रही। आपके भरोसे की बुनियाद पर अमर उजाला का सफर भी आगे बढ़ता रहा। अब अमर उजाला 56वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तो शहर में भी बदलाव के नए रंग दिखेंगे। 
विज्ञापन
बरेली शहर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अमर उजाला के 55 वर्षों के सफर में साल दर साल बरेली शहर ने तरक्की की। शहर के विकास और बदलाव के लिए हमने लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को उठाया। 55 वर्ष के सफर में अखबार और शहरवासियों की कदमताल का नतीजा सुखद है। शहर की मुख्य सड़कें स्मार्ट हुईं। पुलों के निर्माण ने यातायात को सुगम बनाया। अगर हम बीते 55 वर्ष की बात करें तो तब एक भी पुल शहर में नहीं था। यातायात बढ़ा तो शहर में जाम की समस्या भी बढ़ी। 

विज्ञापन


अमर उजाला ने शहरवासियों के मुद्दों को उठाया। जहां जरूरत पड़ी, शहरवासियों ने आंदोलन किए। अखबार ने आपकी आवाज को सरकार तक पहुंचाया। नतीजा पहले किला क्रॉसिंग पर पुल बना। चौपुला और श्यामगंज के बाद सेटेलाइट में भी फ्लाईओवर बने। अब अटल सेतु को पुराने चौपुला पुल से जोड़ने का काम चल रहा है। जून तक दोनों पुल आपस में जुड़ जाएंगे। इससे आवागमन और आसान होगा।



अब पूरा होगा कुतुबखाना पुल का निर्माण
शहर की रंगत बदलती रही। आपके भरोसे की बुनियाद पर अमर उजाला का सफर भी आगे बढ़ता रहा। अब अमर उजाला 56वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है तो शहर में भी बदलाव के नए रंग दिखेंगे। कुछ वर्ष पहले तक बरेली में पर्यटन स्थलों की कमी खटकती थी। समय-समय पर अमर उजाला के माध्यम से जनता एवं जनप्रतिनिधियों इस मुद्दे को सरकार तक पहुंचाया। तब नॉथ कॉरिडोर का प्रस्ताव आया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे हरी झंडी दिखाई है। साल 2024 में नाथ कॉरिडोर परियोजना के तहत शहर के सातों नाथ मंदिर आपस में जुड़ जाएंगे। चौड़ी और अतिक्रमणमुक्त सड़कें होंगी। शहर के चौराहे शिवमय होंगे। 170 करोड़ से बन रहा बाजार हाट विकसित हो जाएगा। 11 करोड़ लागत के स्काई वॉक का भी आनंद आप ले सकेंगे। कुतुबखाना पुल पर फरवरी से वाहन रफ्तार भरेंगे।

विज्ञापन

अमर उजाला ने बुलंद आपकी आवाज तो बदलाव का हुआ आगाज

चौपुला पुल: लखनऊ-दिल्ली हाईवे पर चौपुला शहर का मुख्य चौराहा है। एक दशक पहले यहां पुल बना। बदायूं की ओर आवागमन कुछ सहूलियत भरा हो गया लेकिन सड़क चौड़ी नहीं थी। अमर उजाला ने इस मुद्दे को उठाया तो तत्कालीन कमिश्नर माजिद अली ने अवस्थापना निधि से सड़क चौड़ी कराई।


कुदेशिया पुल: अगर हम अतीत पर नजर डालें तो याद आता है कि कुदेशिया फाटक पर पुल न होने से रेलवे क्रॉसिंग पर लंबा जाम लगता था। अमर उजाला ने 10 वर्ष पहले मुहिम छेड़ी तो सकारात्मक परिणाम आए। क्रॉसिंग चौड़ी होने के साथ ही फ्लाईओवर का निर्माण हुआ।


किला पुल: किला रेलवे क्रॉसिंग पर भी जाम लगता था। एंबुलेंस तथा स्कूली वाहन भी इसमें फंस जाते थे। सिंगल लेन पुल बना, फिर अमर उजाला ने डबल लेन पुल के लिए खबरों के माध्यम से मुहिम छेड़ी तो जनता ने साथ दिया। अमर उजाला के सुझाव पर डबल लेन पुल बना। जब यह पुल जर्जर हुआ तो एक बार फिर मुहिम छेड़ी गई और पांच करोड़ की लागत से मरम्मत का काम 2023 में पूरा हुआ।


श्यामगंज पुल:
श्यामगंज के व्यस्त बाजार में आना-जाना मुश्किल हो रहा था। अमर उजाला ने जब फ्लाईओवर की जरूरत बताई तो पहले विरोध हुआ लेकिन जब व्यापारी पुल की जरूरत को समझ पाए तो सहमत हुए। 2017 में श्यामगंज में फ्लाईओवर बनकर तैयार हो गया। पुल की तकनीकी खामी दूर करने से लेकर सर्विस लेन बनवाने तक में अमर उजाला ने योगदान दिया।


लाल फाटक पुल: लाल फाटक क्रॉसिंग पर पुल के निर्माण की मांग 2008 में उठी। अमर उजाला ने इसे लेकर खबरें प्रकाशित कीं। जनता की बात शासन तक पहुंची तो पुल का निर्माण शुरू हुआ। आखिरकार, अप्रैल 2023 में पुल बनकर तैयार हो गया और जनता को समर्पित किया गया। लोगों को जाम से राहत मिली।
विज्ञापन

बरेली का आइना बन गया है अमर उजाला
महशूर शायर प्रोफेसर वसीम बरेलवी ने कहा कि अमर उजाला के बरेली में प्रकाशित होने से पहले सिर्फ अंग्रेजी अखबार ही लोग पढ़ते थे। इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खबरें होती थीं। यही खबरें पढ़कर लोग संतुष्ट भी हो जाते थे क्योंकि और कोई विकल्प नहीं था। स्थानीय खबरें भी होती हैं, इसका तजुर्बा लोगों को अमर उजाला को पढ़कर हुआ। 

निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकारिता का नाम है अमर उजाला
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एके चौहान ने कहा कि सामाजिक सरोकारों को साथ लेकर अमर उजाला का कारवां बढ़ता जा रहा है। वर्ष 1976 के बाद जब मैं बरेली आया था तभी मेरा परिचय अमर उजाला से हुआ। इस अखबार ने शहरवासियों को बड़े-बड़े तोहफे दिए हैं। पढ़ाई के दौरान भी जब परीक्षा के परिणाम या नौकरी के लिए रिक्तियों की जानकारी लेनी होती थी, तब अमर उजाला ही याद आता था। सेहत के प्रति लोगों को परामर्श देने के लिए दिल की बीमारी और मधुमेह पर मेरे कई लेख अमर उजाला में प्रकाशित होते थे। शहर के मुद्दों को बेहतरी से उठाना, सच्चाई के करीब रहकर खबर देना, अपने उद्देश्यों पर टिके रहना अमर उजाला की पहचान है।

निष्पक्ष खबरें अमर उजाला की पहचान
मेयर उमेश गौतम ने कहा कि चाहें शहर के विकास का मुद्दा हो या फिर राजनीतिक खबरें हों, मेरी नजर में बिनी किसी लाग लपेट के निष्पक्ष खबरें अमर उजाला की पहचान हैं। और 55 वर्ष तक निष्पक्षता के साथ आगे बढ़ने की वजह से ही अमर उजाला नंबर वन बना हुआ है। 

पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन ने कहा कि अगर मैं संक्षेप में अमर उजाला के बारे में बताना चाहूं तो यही कहूंगा कि सत्य के प्रति दृढ़ता और वसूलों की बात इसके बुनियाद में है। अमर उजाला परिवार के साथ मेरे बहुत से अनुभव जुड़े हुए हैं।

पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन ने कहा कि यह केवल एक अखबार नहीं। यह हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। अमर उजाला को जब मैं पढ़ती हूं और देखती हूं तो लगता कि खबरें पूरी तरह निष्पक्ष हैं। किसी ओर झुकाव नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें