बरेली। उर्स-ए-रजवी के आखिरी दिन शनिवार को कुल शरीफ में आला हजरत के दीवानों ने उनकी बारगाह में हाजिरी दी और सरजमीं को चूमकर अकीदत का इजहार किया। आला हजरत दरगाह से लेकर उर्स स्थल इस्लामिया मैदान और आसपास के इलाकों में तेज गर्मी और उमस की परवाह किए बगैर जायरीन ने मजहबी रहनुमा को खिराज-ए-अकीदत पेश की।
आला हजरत इमाम अहमद रजा खां फाजिले बरेलवी के उर्स के आखिरी दिन दरगाह प्रमुख मौलाना सुब्हान रजा खान की सरपरस्ती, सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रजा कादरी की सदारत व सैयद आसिफ मियां की देखरेख में इस्लामिया मैदान पर महफिल सजाई गई। सुबह आठ बजे महफिल का आगाज तिलावत-ए-कुरान से किया गया। दोपहर 2:38 बजे कुल शरीफ की रस्म अदा की गई। फातिहा कारी रजा-ए-रसूल, मौलाना बशीर उल कादरी, मुफ्ती जईम रजा ने पढ़ी। सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन मियां व मौलाना तौसीफ रजा ने हिंदुस्तान समेत दुनिया में अमन-ओ-सुकून की खुसूसी दुआ की।
उर्स स्थल पर सुबह से रजा के दीवानों का रेला पहुंचता रहा। वक्त के साथ अकीदमंदों का जमावड़ा बढ़ता रहा। दोपहर में जोहर की नमाज के बाद स्थानीय लोगों का हुजूम उमड़ा। सेटेलाइट रोड श्यामगंज, कालीबाड़ी, नैनीताल रोड, कोहाड़ापीर, सिटी चौपुला रोड, सिविल लाइंस मार्ग से रजा के दीवाने धार्मिक नारे लगाते हुए उर्स स्थल की ओर बढ़ते रहे। जैसे ही कुल की रस्म शुरू हुई, जो जहां था, वहीं ठहर गया। लोगों ने नम आंखों और लरजते होठों से हाथ उठाकर दुआ की।
इसके बाद उर्स स्थल से अकीदतमंदों की रवानगी का सिलसिला शुरू हुआ। तमाम लोग खरीदारी करते दिखे। लंगर पर भी भीड़ रही। यह नजारा शाम ढलने तक बना रहा। उर्स के दौरान कुछ जगहों पर सौहार्द की झलक भी देखने को मिली। हिंदू-मुस्लिम सभी ने मिलकर जायरीन पर फूल बरसाए और उनका इस्तकबाल किया।