एक नेता और वकील के कहने पर दिया था बयान
पीड़िता ने बयान से मुकरते हुए कहा कि उसकी जन्मतिथि 19 जनवरी 2005 है। दीपक राठौर ने उसके साथ कभी भी छेड़खानी, अश्लील हरकत या दुष्कर्म नहीं किया। कभी जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर उसे अपमानित नहीं किया। ग्राम प्रधान चुनाव की रंजिश में उसने एक नेता और एक वकील के कहने पर बयान दिया था। रिपोर्ट दर्ज कराने वाला पीड़िता का पिता भी बयानों से मुकर गया। उसने कुछ लोगों के कहने पर रिपोर्ट दर्ज कराने की बात कही। पीड़िता की मां ने भी ऐसी किसी घटना से इंकार कर दिया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने दीपक राठौर को आरोपों से बरी कर दिया।
क्या है पॉक्सो एक्ट की धारा 22
पॉक्सो एक्ट की धारा 22 का उद्देश्य इसके दुरुपयोग को रोकना है। यह धारा पॉक्सो एक्ट के तहत झूठी शिकायत करने या गलत जानकारी देने को दंडनीय बनाती है। इस धारा के तहत छह माह की सजा और जुर्माने का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति किसी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत किए गए अपराध के संबंध में झूठी शिकायत करता है या झूठी जानकारी देता है तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।