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देसी रेत से बनीं चार इंच की दीवारों पर टिका था वजनदार लिंटर

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देसी रेत से बनीं चार इंच की दीवारों पर टिका था वजनदार लिंटर - फोटो : अमर उजाला, बरेली
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नवाबगंज/क्योलड़िया। चार कमरों का जो लिंटर धराशायी हुआ वो बेहद कमजोर दीवारों पर टिका था। उठाते वक्त बैलेंस बिगड़ते ही जैक स्लिप हो गया और लिंटर धड़ाम हो गया। गनीमत रही कि लिंटर का बड़ा हिस्सा फिसलकर एक साइड की अपेक्षाकृत चौड़ी दीवार के सहारे टिक गया। इस दौरान कई लोग नीचे फंस गए जिन्हें लिंटर तोड़कर निकाला जा सका। घटना के बाद भवन मालिक और ठेकेदार पक्ष एक-दूसरे पर दोष मढ़ रहे हैं।
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क्योलड़िया में परचून की दुकान चलाने वाले लियाकत की माली हालत ठीक है। गांव में करीब सात सौ वर्ग गज जगह में घर है। इसमें करीब तीन सौ वर्ग गज में दो साल पहले ही चार कमरे बनाकर उन पर ईटों वाला लिंटर डाला गया था। उस वक्त लिंटर की ऊंचाई करीब बारह फुट थी पर नीचे भराव डालकर मकान सड़क से ऊंचा करने में लिंटर दस फुट से भी कम ऊंचा रह गया। इसी वजह से लियाकत अपने मकान का लिंटर ऊंचा उठाना चाहते थे। उन्होंने नहर किनारे आम के पेड़ पर लगे विज्ञापन से लिंटर उठाने वाले सितारगंज निवासी शमशाद का नंबर लिया था। उनसे संपर्क के बाद शमशाद ने ठेकेदार फरियाद के साथ मुआयना किया। सौदा 37 हजार रुपये में तय हुआ। इसमें से कुछ रकम एडवांस के तौर पर दी गई। सीमेंट, रेत, ईंट व अन्य लागत लियाकत को अलग से देनी थी।
ठेकेदार फरियाद के भाई सद्दाम की मानें तो चार इंच की दीवारों पर ही लिंटर टिका हुआ था। इनमें एक ही दीवार नौ इंच की थी जिस पर बाद में लिंटर का बाकी हिस्सा टिक गया। यह भी बताया कि दीवार में सीमेंट कम था और ज्यादा मात्रा देसी रेत की थी जो सीमेंट के बाद ज्यादा मजबूती से नहीं चिपकती। करीब 22 जैक के सहारे जब लिंटर को उठाया गया तो दीवारें ये वजन नहीं सह सकीं और असंतुलित होकर लिंटर गिर पड़ा। वहीं लियाकत का कहना था कि दीवारें कमजोर नहीं थीं। लिंटर उठाते वक्त सारे जैक एक साथ उठाए जाते हैं। शायद एक तरफ का लिंटर ज्यादा और दूसरी तरफ का कम उठा जिससे हादसा हुआ। अब जिम्मेदारी मानने की बजाय ये लोग उन पर दोष डाल रहे हैं।
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