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साल भर पुरानी प्लानिंग, तीन महीने रेकी और एक करोड़ की सुपारी

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संजीव गर्ग का फाइल फोटो।
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बरेली। परसाखेड़ा में महावीर प्लाइवुड फैक्टरी के मालिक संजीव गर्ग की हत्या की योजना उनके साढ़ू के दो बेटों ने साल भर से भी पहले बनाई थी। हरियाणा और राजस्थान के जिन बदमाशों को एक करोड़ में सुपारी दी गई, उन्होंने करीब तीन महीने तक फैक्टरी और प्रेमनगर में घर के बीच संजीव गर्ग की तीन महीने तक रेकी की और फिर 20 जनवरी की रात हत्या कर दी। हत्या में मुरादाबाद और बरेली के भी बदमाशों की मदद ली गई।
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संजीव गर्ग के साढ़ू के बेटे गौरव मित्तल उर्फ सोनू और सौरभ मित्तल उर्फ मोनू की नजर उनके कारोबार पर थी। पिछले साल तक सोनू और मोनू ही संजीव गर्ग का कारोबार संभालते थे लेकिन कुछ मामलों में मतभेद होने के बाद संजीव गर्ग ने पिछले साल उन्हें फैक्टरी से निकाल दिया था। संजीव के बेटे शुभम डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहे थे और पिता के कारोबार में उनकी खास दिलचस्पी भी नहीं थी, इसलिए सोनू और मोनू उम्मीद लगाए बैठे थे कि एक न एक दिन कारोबार पूरी तरह उनके हाथ में आ जाएगा लेकिन संजीव गर्ग के फैक्टरी से निकाल दिए जाने के बाद उनकी उम्मीदें धराशायी हो गईं। लिहाजा आनन-फानन उन्होंने संजीव गर्ग की हत्या कराने का फैसला ले डाला।
सोनू-मोनू ने सबसे पहले बरेली के ही कुर्मांचलनगर में रहने वाले सुपारी किलर विकास कश्यप उर्फ विकास भल्ला से संपर्क किया। विकास ने उन्हें तहजीब नाम के बदमाश से मिलवाया। तहजीब ने पहले हामी भरी लेकिन बाद में मुकर गया। इसके बाद विकास ने मुरादाबाद के दयाराम के जरिए सोनू-मोनू को हरियाणा के सुपारी किलर राजवीर सिंह सरपंच से मिलवाया। राजवीर ने राजस्थान के दीपक सोनी, शुभम कुमावत और मनीष मीणा उर्फ ठाकुर के साथ संजीव गर्ग की हत्या का प्लान तैयार किया।
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इसके बाद संजीव गर्ग की रेकी करने के लिए दयाराम ने बरेली आकर पीलीभीत बाईपास पर बजरंग ढाबे के पास किराये पर कमरा ले लिया। कुछ दिन वह यहां मनीष मीणा के साथ रहा लेकिन बाद में दूसरे बदमाशों को भी बुला लिया। इस पर मकान मालिक को कुछ संदेह हुआ तो उसने कमरा खाली करा लिया। इसके बाद कुछ दिन दयाराम को सोनू-मोनू ने अपने घर में रखा। इसी दौरान दयाराम ने पीलीभीत से एक अपाचे बाइक खरीदी और विकास भल्ला के साथ संजीव गर्ग की रेकी शुरू कर दी।
करीब तीन महीने तक दोनों लगातार यह देखते रहे कि संजीव फैक्टरी और घर के अलावा कहां-कहां जाते हैं। इसके बाद फैक्टरी और घर के बीच ही उनकी हत्या करने का फैसला लिया गया। 20 जनवरी को जब संजीव फैक्टरी से घर जाने को निकले तो परसाखेड़ा के पास रेनॉल्ट कार शोरूम के पास बदमाशों ने अपनी कार आगे लगाकर उनकी कार रुकवा ली। फिर उन्हें फतेहगंज पश्चिमी में एएनए कॉलेज रोड पर ले जाकर उनकी हत्या कर दी।
चार आरोपी गिरफ्तार : संजीव गर्ग के साढ़ू के बेटे सोनू-मोनू के अलावा कूर्मांचलनगर निवासी विकास कश्यप उर्फ विकास भल्ला. जयपुर (राजस्थान) के थाना कालडेरा की कुमावतों की धानी निवासी शुभम कुमावत।
चार आरोपी फरार : एसएसपी के मुताबिक थाना कांठ (मुरादाबाद) के गांव देहरी जुम्मन निवासी दयाराम उर्फ विकास, जयपुर (राजस्थान) के थाना शाहपुरा के तहत वार्ड 16 सैनी कॉलोनी निवासी दीपक सोनी उर्फ दीपक रॉयल, महेंद्रगढ़ (हरियाणा) के थाना नारनौल के गांव रघुनाथपुर निवासी राजवीर सिंह उर्फ सरपंच और जयपुर (राजस्थान) के थाना कोटपुतली के गांव बसई निवासी मनीष मीणा उर्फ ठाकुर फरार हैं।
जान बख्शवाने के लिए घर से मंगाकर दे दिया करोड़ों का सोना कैश फिर भी नहीं माने बदमाश
पुलिस के मुताबिक संजीव गर्ग ने बदमाशों से मुंहमांगी कीमत लेकर अपनी जान बख्श देने की फरियाद की। बदमाशों के हामी भरने के बाद उन्होंने बेटे शुभम को फोन करके कहा कि घर में आयकर विभाग का छापा पड़ने वाला है। वह दो लोगों को भेज रहे हैं, घर का सारा सोना और कैश एक बैग में भरकर उन्हें दे देना। संजीव के कहने के मुताबिक शुभम ने घर में रखी सोने की 20 ईंटें और एक करोड़ से ज्यादा कैश दो अलग-अलग बैग में भरा और फिर दोनों बैग एक बड़े बैग में भरकर फीनिक्स मॉल के पास बदमाशों के सुपुर्द कर दिया।
फीनिक्स मॉल के पास ये लेन-देन होने के बाद बदमाशों ने शुभम से घर लौट जाने को कहा। काफी दूर तक उनका पीछा भी किया ताकि शक की वजह से वह कहीं लौट न आएं या पुलिस को फोन कर दें। इसके बाद सारा माल लेकर दोनों बदमाश एएनए कॉलेज रोड पर अपने साथियों के पास पहुंचे और फिर कुछ ही मिनटों में लोहे की रॉड और धारदार हथियारों से संजीव की हत्या कर दी। घटना को हादसा दिखाने के लिए कार में भी तोड़फोड़ की।
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