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कचरा ट्रीटमेंट प्लांट का बॉयलर फटने से लगी आग, एक कर्मचारी झुलसा

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आग बुझाती दमकल कर्मी। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बाकरगंज के प्लांट तक नहीं पहुंच सकी दमकल, लंबा पाइप लगाकर किया जा सका आग पर काबू

बरेली। बाकरगंज में नगर निगम के कचरा ट्रीटमेंट प्लांट के बॉयलर में धमाके के बाद रविवार की शाम आग लग गई। सूचना पर दमकल निकली पर कचरे के ढेर और तंग रास्ते की वजह से मौके पर पहुंच नहीं सकी। काफी दूर से पाइप ले जाकर आग पर काबू पाया गया। आग में ठेकेदार का एक कर्मचारी झुलस गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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शाम करीब तीन बजे फायर स्टाफ को बाकरगंज के ट्रीटमेंट प्लांट में आग लगने की सूचना मिली। एफएसओ रवीश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। दमकल की एक के बाद एक करके तीन गाड़ियां निकलीं पर कचरे व गंदगी से बंद संकरे रास्ते से होकर मौके पर पहुंचना उनका संभव नहीं हो सका। तब दमकल टीम ने पाइपों को जोड़कर प्लांट तक पानी ले जाने की व्यवस्था की। पता लगा कि बॉयलर में आग लगी है, जिससे ऊंची लपटें उठ रही थीं। आग की लपटें कूड़े के ढेर तक भी पहुंच गई थीं। काफी मशक्कत के बाद दमकल टीम ने आग पर काबू पा लिया।
हादसे में भोजीपुरा के मोहम्मदपुर ठाकुरान निवासी 40 वर्षीय जितेंद्र गंभीर रूप से झुलस गए। जितेंद्र यहां ठेकेदार के अधीन काम करने वाला बॉयलर कर्मचारी था। बॉयलर फटने से पहले जितेंद्र घायल हुआ तो आग की लपटों में घिरकर झुलस भी गया। दमकल टीम के पहुंचने से पहले किला थाने की चीता मोबाइल मौके पर पहुंची और वहां से झुलसे कर्मी को निकालकर उसे जिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। बताया गया कि जितेंद्र करीब 40 फीसदी झुलसा है। किला इंस्पेक्टर मनोज कुमार ने भी मौका मुआयना किया। नगर निगम प्रशासन को अग्निकांड की सूचना दे दी गई है।

सीएफओ की गाइडलाइन भी ताक पर

शहर में इन दिनों लगभग रोज ही अग्निकांड की घटनाएं हो रही हैं। अधिकांश जगह आग ऐसे स्थानों पर लग रही है जहां दमकल का पहुंचना संभव नहीं हो पाता। जान की बाजी लगाकर दमकल स्टाफ किसी तरह आग पर काबू पाता है। दीवाली से पहले सीएफओ चंद्रमोहन शर्मा ने गाइडलाइन जारी कर दुकानदारों को कई निर्देश दिए हैं। इनका पालन न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। बावजूद इसके चार दिन बाद भी दुकानदारों ने एक भी नियम का पालन करने की जहमत नहीं उठाई है। तंग रास्तों पर आग लगने की समस्या का जिक्र भी गाइडलाइन में है। रास्ता ठीक होता तो बाकरगंज के प्लांट में लगी आग को समय रहते बुझाया जा सकता था।
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