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जिम्मेदार ही बिगाड़ रहे हैं अपनी बरेली की शक्ल

Fri, 12 Apr 2013 05:30 AM IST
Bareilly
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यातायात, पुलिसिंग, नगर निगम, कारोबारी और प्रशासन ही नहीं आम शहरी भी बदशक्ल हो रही बरेली के प्रति लापरवाह हो चला है। लोग परेशान तो हैं लेकिन पूरी व्यवस्था ने उन्हें बात-बात पर सुविधा शुल्क देते हुए चुप रहने को मजबूर कर रखा है। व्यवस्था के अलंबरदार इस बात पर बहुत खुश होते हैं कि कायदे टूट रहे हैं क्योंकि तभी उन पर नोट झरते हैं। शहर को सुंदर बनाने के सरोकार के साथ गुरुवार को बरेली के व्यापारियों ने अमर उजाला परिसर में उन कमियों की पड़ताल की जिनकी वजह से बदइंतजामी बढ़ रही है। मंथन के इस नए सिलसिले की पहली कड़ी में शहर के अतिक्रमण और यातायात पर लंबी हुई हुई। पेश हैं कुछ खास बातें।
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निगम नहीं देता कोई सुविधा
मंथन के दौरान व्यापारियों नेताओं का कहना था कि पार्किंग के स्थान तो नगर निगम ने नहीं बनाए, दूसरी भी कोई सुविधा वह उपलब्ध कराने में अक्षम है। टॉयलेट के लिए लोग सड़क किनारे खाली पड़ी जगह ही तलाशते हैं। महिलाओं को तो और ज्यादा दिक्कत होती है। कहीं भी पानी की टोटियां अब दिखाई नहीं देतीं। ट्रैफिक लाइट लगाने की जिम्मेदारी भी निगम ने नहीं निभाई। फड़ और खोखो वालों को जगह देने के लिए भी कई बार मांग रखी गई, मगर कभी ध्यान नहीं दिया। सिर्फ बात होकर रह गई, केवल एकाध बार बैठक कर ली गई। बेतरतीब तरीके से होर्डिंग लगने को भी अतिक्रमण की एक बड़ी वजह बताया, इसके लिए भी निगम को दोषी ठहराया। कहा कि उसे अपने होर्डिंग पर वैधता की तारीख लिखने की फुर्सत नहीं है। फड़ वालों के लिए कोई निश्चित स्थान न होने की वजह से ही यह समस्या बनी हुई है। ऐसे लोगों के लिए जीआईसी के मैदान वाली जगह दिलाने को कई बार बात की गई, मगर निगम ने ध्यान ही नहीं दिया। सभी व्यापारी नेताओं ने इस बात का समर्थन किया कि इन फड़ वालों के लिए स्थान तय होना चाहिए।
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सारे विभाग कहीं न कहीं दोषी
नगर निगम और पुलिस के साथ ही बीडीए भी निशाने पर रहा। राजेश अग्रवाल ने कहा कि वह तो खुद बीडीए बोर्ड के सदस्य हैं । बीडीए अफसर अपनी जुगाड़ में लगे रहते और सुझावों पर ध्यान नहीं देते। राजेंद्र गुप्ता का कहना था कि बीडीए में भी इच्छाशक्ति की कमी है। यहीं के एक पूर्व वीसी ने जिद कर ली थी कि नावल्टी सिनेमा वाली जगह पर जब नई बिल्डिंग बनेगी तो वहां पार्किंग का इंतजाम करना पड़ा । आज इस मार्केट में जाने वाले सारे लोग इसी पार्किंग में अपने वाहन खड़े करते हैं। बिजली और दूरसंचार विभाग के बेकार खंभे हटाने पर किसी का ध्यान नहीं हैै। बिजली वाले भी जहां चाहे अपने ट्रांसफार्मर लगा देते हैं। वे अपने खंभों को भी शिफ्ट करने का काम नहीं करते और इन्हीं खंभों की आड़ में सबसे ज्यादा अतिक्रमण फैला हुआ है।
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टेंपो संचालन पर अंकुश नहीं
टेंपो संचालन के लिए पुलिस और परिवहन विभाग पर कोई योजना न होने को भी व्यापारी नेता नाराज थेा। उनका कहना था कि हर रोड के लिए संख्या निर्धारित होनी चाहिए। दूसरा चौराहा से 50 मीटर दूरी पर स्टैंड बनाए जाने की घोषणा का भी कभी पालन नहीं हुआ। चौराहे से दूर टेंपो के लिए लेन निर्धारित कर देनी चाहिए और वहां जगह न होने पर टेंपो को रुकने ही नहीं देना चाहिए। कहीं भी टेंपो रोककर सवारी बैठाने पर रोक लगनी चाहिए। साथ ही यह भी देखना चाहिए चालकों के लाइसेंस ठीक हों। ये टेंपो चालक किसी से भी झगड़ा कर बैठते हैं, चाहे गलती खुद की हो। ये सब टेंपो चालक पुलिस की छूट से बेपरवाह हैं।
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यहां हो सकती हैं पार्किंग
नगर निगम की ओर से शहर में शहामतगंज सब्जी मंडी, मोती पार्क और ऐलन क्लब में मल्टी लेवल पार्किंग का प्रस्ताव है, इनमें से भी केवल शहामतगंज में ही मेयर ने खुद जाकर सर्वे किया था। इसके बावजूद बात आगेे नहीं बढ़ सकी। मंथन के दौरान व्यापारी नेताओं ने शहर को हराभरा, प्रदूषण मुक्त बनाने और जाम व अतिक्रमण की समस्या दूर करने के लिए कुछ स्थान सुझाए हैं।
- पंजाबी मार्केट,
- प्रसाद टॉकीज
- इंपीरियल सिनेमा,
- कुमार टॉकीज
- तिलक इंटर कॉलेज का मैदान
- आजाद इंटर कॉलेज
- कोतवाली के पीछे
- अयूब खां चौराहा
- चौपुला
- इस्लामिया इंटर कॉलेज
- कुतुबखाना


निशाने पर रही पुलिस
जिस पुलिस प्रशासन पर शहर की सुरक्षा के साथ-साथ कानून व्यवस्था का जिम्मा है, उसकी कार्यप्रणाली पर व्यापारियों ने सवाल उठाए। उनका मानना है कि शहर में जाम और अतिक्रमण की समस्या कई सालों से है। पुलिस चाहती तो इस मुसीबत को मिनटाें में दूर कर सकती है, लेकिन जान बूझकर ऐसा नहीं करती। सभी ने एक सुर में कहा कि कुछ दिन अभियान चलाने के बाद ‘साहब’ ठंडे हो जाते हैं, फिर आवाज उठती है तो कार्रवाई को निकलते हैं। चंद दिनों बाद यह अभियान भी शांत हो जाता है और हमें फिर वहीं दिक्कत शुरू हो जाती है। व्यापारियों ने कहा कि जब तक पुलिस ‘वसूली’ अभियान पर अडिग रहेगी, तब तक शहर जाम और अतिक्रमण के भंवर में फंसा रहेगा।
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