बरेली। फाजिले बरेलवी आला हजरत मौलाना अहमद रजा खां के बेटे मुफ्ती-ए-आजम हिंद मौलाना मुस्तफा रजा खां को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने गारंटी पर बिना पासपोर्ट के हज यात्रा के लिए सऊदी अरब भिजवाया था।
मुफ्ती-ए-आजम हिंद का ही फतवा है कि इस्लाम में फोटो खिंचवाना हराम है। वह फोटो खिंचवाने से इतना परहेज करते थे कि हज जाने के लिए जब पासपोर्ट बनवाने को फोटो की जरूरत पड़ी तो उन्होंने साफ इंकार कर दिया था। उनकी सवाने उमरी( जीवनी) में लिखा है कि वर्ष 1972 में देश में कांग्रेस की हुकूमत थी और इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री थीं। आला हजरत के मुरीदों के जरिए जब तत्कालीन प्रधानमंत्री को यह खबर मिली की मुफ्ती-ए-आजम हिंद हज के सफर पर जाना चाहते हैं। लेकिन फोटो खिंचाना इस्लाम में हराम होने की वजह से उनका पासपोर्ट नहीं बन रहा है। इस पर इंदिरा गांधी ने मुफ्ती-ए-आजम समेत सात लोगों के बार में सउदी अरब के शासक शाह फैसल के बात करके उनकी गारंटी लेकर बिना पासपोर्ट के उन्हें हज यात्रा की इजाजत मांगी थी। इंदिरा गांधी की गुजारिश पर सऊदी शासक की इजाजत मिलते ही मुफ्ती-ए-आजम उनकी अहलिया, उनके नवासे हजरत खालिद मियां, भांजी,खादिमा और साउथ अफ्रीका के तालिबे इल्म अब्दुल हादी एंव इशहाक बहेड़वी हज यात्रा पर बिना पासपोर्ट के गए थे। ऐसा हिंदुस्तान में पहली बार हुआ था। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन से सचिव आबिद मियां कहते हैं कि गिनीज बुक में भी इस वाकये का जिक्र हैं। देश में ऐसा पहली बार हुआ कि बिना पासपोर्ट के कोई हज यात्रा कर आया था। टीटीएफ के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य नासिर कुरैशी कहते हैं कि मुफ्ती-ए-आजम हिंद की पैदाइश 18 जुलाई 1892 को मोहल्ला सौदारगरान में हुआ था। आपका 92 साल की उम्र में 12 नवंबर 1981 को विशाल हुआ। पूरी जिंदगी में आपने सौ से ज्यादा फतवे लिखे। नसबंदी के खिलाफ फतवा उनका सबसे ज्यादा चर्चित रहा।
इंसेट--
ढाका में एक लाख लोग मुरीद
बरेली। दरगाह आला हजरत के सज्जादानशीन हजरत मौलाना सुब्हानी मियां पांच दिन की बंगलादेश यात्रा पर हैं। वहां उन्होंने एक लाख लोगों को मुरीद किया है।
सज्जदानशीन के सचिव आबिद मियां ने बताया कि 15 दिसंबर को हजरत सुब्हानी मियंा बंगलादेश यात्रा पर हैं। हवाई अड्डे पर पहुंचकर वहां से सैकड़ों की तादाद में उलेमाओं ने सज्जादानशीन का गर्मजोशी से स्वागत किया। वहां हजरत ने आला हजरत इमाम अहमद रजा खां कांफ्रेंस को संबोधित किया है। साथ ही मसलक-ए-आला हजरत पर नजरियत पर रोशनी डाली। ढाका में एक लाख लोगों ने उनके मुरीद होकर आला हजरत के बताए रास्ते पर चलने का अहद किया है।